विदेश की खबरें | यूक्रेन खाद्यान्न समझौते में रुकावट से संयुक्त राष्ट्र खाद्य कार्यक्रम पर पड़ा असर
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल एस ने कहा, ‘‘अब हमें अनाज के लिए किसी और देश से मदद लेनी होगी। हम नहीं जानते कि बाजार की क्या स्थिति रहती है लेकिन खाद्य पदार्थ की कीमतों में वृद्धि होगी।’’

डब्ल्यूएफपी ने मंगलवार को बजट में कटौती का हवाला देते हुए जॉर्डन में दो शिविरों में रह रहे 1,20,000 सीरियाई शरणार्थियों के लिए हर माह दी जाने वाली नकद सहायता राशि को कम करना शुरू कर दियाजिससे शरणार्थी और जॉर्डन के अधिकारी परेशान हैं।

एजेंसी ने कहा कि वह जॉर्डन में 50,000 शरणार्थियों को दी जाने वाली मदद में धीरे-धीरे कटौती करेगी।

जॉर्डन में सीरियाई शरणार्थियों ने इस खबर पर निराशा जतायी है क्योंकि वे अभी नौकरी तथा महंगाई से संघर्ष कर रहे हैं।

अम्मान में एक सीरियाई शरणार्थी खदीजा महमूद ने कहा, ‘‘इस फैसले ने हमारी जिंदगियां बर्बाद कर दी है। हम अपार्टमेंट का किराया, बिजली का बिल, पानी का बिल कैसे चुकाएंगे? हमारी इतनी क्षमता नहीं है।’’

दरअसल, रूस ने ‘काला सागर खाद्यान्न समझौते’ से कदम पीछे खींच लिए है। यह समझौता खाद्यान्न संकट से निपटने के लिए यूक्रेन से अनाज का सुरक्षित निर्यात सुनिश्चित कर रहा था।

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