देश की खबरें | यूजीसी-नेट मामला घोटालों की शृंखला में नया घोटाला: बंगाल के शिक्षा मंत्री

कोलकाता, 20 जून पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘यूजीसी-नेट’ को रद्द करने का केंद्र का फैसला इस बात का संकेत है कि यह ऐसी घटनाओं की शृंखला में एक और घोटाला है।

बसु ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ में कथित अनियमितताओं का विवाद उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने के बीच केंद्र सरकार ने 19 जून को यूजीसी-नेट रद्द करने का आदेश दिया, क्योंकि सरकार को इस बात की जानकारी मिली थी कि परीक्षा में धांधली की गयी है, साथ ही मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘घोटालों की शृंखला में नया घोटाला बाजार में आया! परीक्षा की शुचिता से समझौता करने के कारण यूजीसी-नेट रद्द किया गया।’’

यूजीसी-नेट जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति और भारतीय विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में पीएचडी में प्रवेश के लिए भारतीय नागरिकों की पात्रता निर्धारित करने से संबंधित परीक्षा है।

इस बात पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कि क्या केंद्रीय एजेंसी मुख्य साजिशकर्ता (मास्टरमाइंड) को पकड़ सकती है, उन्होंने पोस्ट किया, ‘‘सीबीआई जांच के आदेश दिए गए हैं! सवाल यह है कि क्या वे ‘हेड (मुख्य व्यक्ति)’ को पकड़ सकते हैं।’’

बसु ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किसे 'हेड' कह रहे थे।

इससे पहले, उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों से राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) में अनियमितताओं की जांच करने का आग्रह किया था और सवाल किया था कि क्या इस मामले में भी केंद्र का रवैया वैसा ही होगा, जैसा पश्चिम बंगाल में शिक्षकों की भर्ती में कथित घोटाले की जांच को लेकर था।

पिछले सप्ताह उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘हम दोनों मामलों में न्याय और पारदर्शिता की मांग करते हैं।"

इस बीच, यादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने रद्द की गई यूजीसी-नेट परीक्षा के लिए नयी तिथि की मांग की।

शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा रद्द करने को जायज ठहराते हुए राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई से प्राप्त जानकारियों का हवाला दिया, जिसमें परीक्षा की शुचिता के साथ संभावित समझौते की बात कही गयी थी।

पिछली पद्धतियों से इतर इस वर्ष राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) 18 जून को पारंपरिक प्रारूप में (कागज और कलम के साथ) आयोजित की गई, जिसके लिए रिकॉर्ड 11 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था।

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