ताजा खबरें | राज्यसभा में 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 81वीं वर्षगांठ पर श्रद्धांजलि दी गई

नयी दिल्ली, नौ अगस्त राज्यसभा में बुधवार को 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 81वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और शहीदों की याद में कुछ देर मौन रखा गया।

सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने के बाद सभापति जगदीप धनखड़ ने ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' का उल्लेख करते हुए देश की संप्रभुता व अखंडता को बनाए रखने और भारत की सेवा के लिए स्वयं को फिर से समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने इसे आत्मनिरीक्षण करने और अपने नैतिक योगदान पर विचार करने का अवसर बताया और सदस्यों से कहा कि उन्हें राष्ट्र की सेवा में अधिक उत्साह के साथ फिर से समर्पित होना चाहिए, लोगों की आकांक्षाओं को साकार करने और राष्ट्रों के समूह में भारत के लिए गौरवपूर्ण स्थान सुरक्षित करने प्रयास करना चाहिए।

सभापति ने इस बात पर जोर दिया कि 'भारत छोड़ो' का आह्वान आज हमारे अमृत काल में और भी अधिक प्रासंगिक है, क्योंकि यह आंदोलन इस बात का प्रतीक है कि लोग क्या हासिल करने में सक्षम हैं, यदि वे दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ एक उद्देश्य के लिए मिलकर काम करते हैं।

महात्मा गांधी के 'करो या मरो' के आह्वान के संबंध में धनखड़ ने रेखांकित किया कि "इसने जनता में एक नयी ऊर्जा का संचार किया, जिसकी परिणति हमारे देश को औपनिवेशिक शासन से आजादी हासिल करने में हुई।"

सभापति ने स्वतंत्रता के बाद गरीबी उन्मूलन, साक्षरता को बढ़ावा देने, भेदभाव को खत्म करने और सामाजिक समावेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किए गए प्रयासों को रेखांकित किया।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश इन क्षेत्रों में हासिल की गई निरंतर प्रगति पर गर्व करता है।

इसके बाद पूरे सदन ने शहीदों के सम्मान में मौन रखा।

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