देश की खबरें | एशियाई खेलों के लिए ट्रायल का आयोजन बंद दरवाजों के पीछे

नयी दिल्ली, 21 जुलाई भारतीय ओलंपिक समिति (आईओए) द्वारा नियुक्त तदर्थ समिति ने शुक्रवार को यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम में कुछ पहलवानों के माता-पिता की पैनल के सदस्यों के साथ तीखी बहस के बाद एशियाई खेलों की कुश्ती ट्रायल बंद दरवाजों के पीछे आयोजित करने का फैसला किया है।

ओलंपिक पदक विजेता बजरंग पूनिया (65 किग्रा) और विश्व पदक विजेता विनेश फोगाट (53 किग्रा) को दी गई छूट के मुद्दे पर कुछ पहलवानों और उनके अभिभावकों की तदर्थ समिति के सदस्यों के साथ  नोकझोंक हुई। पहलवानों और उनके अभिभावकों ने इसके विरोध में ट्रायल का बहिष्कार करने की धमकी दी।

पहलवानों के परिवार परीक्षण स्थल पर पहुंचे और तदर्थ पैनल के साथ बहस करते हुए आरोप लगाया कि उनका निर्णय ‘अनुचित’ और ‘अन्यायपूर्ण’ था।

विश्व अंडर 20 चैम्पियन अंतिम पंघाल के माता-पिता और एक अन्य पहलवान विकास कालीरमन के पिता सुभाष कालीरमन की तदर्थ पैनल के सदस्यों के साथ तीखी बहस हो गई।

इस घटना के बाद तदर्थ पैनल ने फैसला किया कि ट्रायल के लिए पहलवान उनके कोच और मालिशिया के अलावा सभी के लिए प्रवेश प्रतिबंधित होगा।

तदर्थ पैनल के सदस्य ज्ञान सिंह ने कहा कि क्षेत्र के डीसीपी (पुलिस उपायुक्त) को यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कर्मी रखने के लिए कहा गया है कि कोई भी हॉल में प्रवेश न करे। ट्रायल तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे और शनिवार को ग्रीको-रोमन के छह और इतनी ही महिला वर्ग में चयन किया जाएगा।

छह पुरुषों की फ्रीस्टाइल वर्ग के लिए ट्रायल रविवार को होंगे।

ज्ञान सिंह ने कहा, ‘‘ ट्रायल का आयोजन कल होगा क्योंकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्थगन आदेश नहीं दिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा काम ट्रायल आयोजित करना है और जो भी पहले स्थान पर रहेगा हम उसका नाम आईओए को भेज देंगे। इसके बाद वे (आईओए) एशियाई खेलों में किसे भेजना चाहते हैं, यह फैसला करना उनका काम है।’’

एशियाई खेलों के लिए कुश्ती ट्रायल एक बड़े विवाद में बदल गया जब तदर्थ समिति ने विनेश और बजरंग को सीधे प्रवेश दे दिया। विनेश और बजरंग डब्ल्यूफआई के निवर्तमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

अंतिम और सुजीत कलकल जैसे कई युवा पहलवानों को यह फैसला नागवार गुजरा और उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई की मांग करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती दी।

बृजभूषण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल रही ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक और मशहूर योगेश्वर दत्त ने भी तदर्थ पैनल के फैसले पर सवाल उठाया था।

आईओए की एथलीट समिति के सदस्य और लंदन ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर ने कोच और तदर्थ पैनल के सदस्यों (ज्ञान सिंह और अशोक गर्ग) के साथ कई बैठकें की और उन्हें युवा पहलवानों के साथ हो रहे अन्याय के बारे में समझाने की कोशिश की।

ज्ञान सिंह ने यह भी कहा कि सितंबर में सर्बिया के बेलग्रेड में होने वाली विश्व चैंपियनशिप के लिए ट्रायल अगले महीने होंगे। इसमें मौजूदा ट्रायल के शीर्ष चार पहलवानों के बीच 10 से 15 अगस्त के बीच मुकाबला होगा।

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