नयी दिल्ली, 23 दिसंबर कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने शुक्रवार को सचिवों से ‘‘केवल लक्षण नहीं, बल्कि बीमारी का उपचार करके’’ लोगों की समस्याओं की जड़ तक पहुंचने और उनका समाधान करने को कहा।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के कार्यालयों में क्रेच (शिशुओं की देखभाल का स्थान), व्यायामशाला, कैफेटेरिया आदि होने चाहिए और उन्हें साफ एवं आकर्षक बनाए रखने के प्रयास किए जाने चाहिए क्योंकि भौतिक वातावरण का कार्य कुशलता पर असर पड़ता है।
गौबा ने प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा आयोजित ‘सुशासन प्रणालियों’ संबंधी एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता विशेष अभियान 2.0 के दौरान जो कुछ किया गया था, वह नियमित रूप से किया जाना चाहिए और उन्होंने अधिकारियों से विशेष मुहिमों का इंतजार नहीं करने को कहा।
गौबा ने इस कार्यक्रम में ‘विशेष अभियान 2.0’ आकलन रिपोर्ट भी जारी की, जिसमें केंद्र सरकार के कई सचिवों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘सुशासन का अर्थ अंततः परिणामों और सेवाओं के वितरण में सुधार करना है। इसका मकसद लोगों की शिकायतों को प्रभावी ढंग से दूर करना है।’’
गौबा ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि अधिकारियों को जनता की शिकायतों के मूल कारण को दूर करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने चाहिए। केवल लक्षणों नहीं, बल्कि बीमारी का इलाज करें।’’
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को ‘‘अत्यधिक काम और नियमित फाइल से घबराना नहीं चाहिए। सार्वजनिक शिकायतों को हल करने के लिए विभागों और मंत्रालयों के भीतर सामूहिक विचार-विमर्श का समय निकाला जाना चाहिए।’’
गौबा ने निर्णय लेने के स्तरों को कम करने के फायदों को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे दक्षता बढ़ेगी और जनहित में निर्णय लेने के कीमती समय की बचत होगी।
उन्होंने कहा कि सुशासन नागरिकों पर भरोसा करते हुए परिणामों में सुधार और सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के बारे में है।
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