नयी दिल्ली, चार जुलाई सेना में शामिल होने के महज चार महीने बाद ही युवा लेफ्टिनेंट बलवान सिंह ने करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी घुसपैठियों के हमले में भारतीय सेना की घातक पलटन का नेतृत्व किया और वह चार जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर कब्जा जमाने वाले बहादुर जवानों में से एक थे।
वह अब प्रसिद्ध ‘18 ग्रेनेडियर्स’ के कर्नल हैं। दुश्मन से लड़ते वक्त घायल होने के बावजूद मुकाबला जारी रखने वाले सिंह ने याद किया, ‘‘वहां से फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह टाइगर हिल पर कब्जे के बाद की जीत थी।’’
उन्हें उनकी बहादुरी के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।
‘18 ग्रेनेडियर्स’ की स्थापना 1976 में हुई और इसने युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इस बटालियन को परम वीर चक्र, दो महावीर चक्र, छह वीर चक्र, सात सेना पदक और थल सेनाध्यक्ष से प्रशस्ति पत्र समेत 52 सम्मानों से नवाजा गया है।
बुधवार को कर्नल सिंह तथा बटालियन के कई अन्य करगिल नायकों ने ‘ऑपरेशन विजय’ में अपने जांबाजों की वीरता को याद किया।
भारतीय सेनाओं के पाकिस्तानी बलों को पीछे हटने के लिए सफलतापूर्वक मजबूर करने के बाद 26 जुलाई 1999 को युद्ध खत्म होने की घोषणा की गयी।
ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) कुशाल ठाकुर ने बताया कि तीन जुलाई 1999 की रात को 18 ग्रेनेडियर्स के जवानों ने टाइगर हिल पर कब्जा जमाने के अपने अभियान की शुरुआत की और अगली सुबह तक अपने अभियान में कामयाबी हासिल की। ठाकुर ने तोलोलिंग और टाइगर हिल की अहम लड़ाइयों के दौरान इस बटालियन की कमान संभाली थी।
ब्रिग्रेडियर (सेवानिवृत्त) ठाकुर ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘12-13 जून 1999 को हमने तोलोलिंग जीता और यह इस युद्ध में महत्वपूर्ण विजय थी। इसने हमारे सशस्त्र बलों तथा देशवासियों का मनोबल ऊंचा किया और पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल गिराया। एक-एक करके हम मुश्को या बटालिक सेक्टर की चोटियों पर कब्जा करते गए और हमारा अगला लक्ष्य टाइगर हिल था।’’
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