देश की खबरें | रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए अन्य क्षेत्रों में ऐसा होना आवश्यक: विजयराघवन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 27 अगस्त प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए, अन्य क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होना आवश्यक है, और देश में मुख्य क्षमताओं का खाका भी तैयार करना होगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विनिर्माण विचारों और उत्पादों के डिजाइन पर काफी हद तक हावी है, क्योंकि यह विनिर्माण और वितरण की वास्तविक प्रक्रिया से है।

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उन्होंने कहा कि यहां तक कि अगर उत्पाद देश या विदेश में निर्मित होता है, तो भी डिजाइन देश के भीतर ही रहता है।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा कि ऐसा रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ), रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सेवा, शिक्षा, स्टार्ट-अप और उद्योग को एक साथ जोड़कर किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि चल रही कोरोना वायरस महामारी के बीच वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को टूटने से बचाया जाना बहुत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि यहां तक कि अगर बहुत सारे विनिर्माण एक स्थान पर होते हैं, अगर कई घटकों और प्रणालियों या सामग्रियों का आयात अधिक होता है, तो स्थिति बहुत खराब हो सकती है।

विजयराघवन ने कहा, ‘‘यह रक्षा, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, संचार आदि जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से सही है। कोई भी यह देख सकता है कि जिन क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता है, उनकी संख्या कम नहीं है।’’

उन्होंने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा आयोजित 'आत्मानिर्भर भारत, रक्षा उद्योग पहुंच’ पर एक वेबिनार में कहा, ‘‘रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता में जाने के लिए, आपको हर जगह आत्मनिर्भरता में जाना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां हम सक्षम नहीं हैं और हमें यह देखने की आवश्यकता है कि हम कैसे प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं ... क्या यह आवश्यक है कि हर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी हों, यदि नहीं तो वे कौन से क्षेत्र हैं जिन्हें हम चुनने जा रहे हैं।’’

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