देश की खबरें | बजट में दिव्यांगजनों, बुजुर्ग व बच्चों के लिए बहुत कम प्रावधान हैं: अधिकार समूह

नयी दिल्ली, दो फरवरी विभिन्न अधिकार समूहों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय बजट 2023-24 में हाशिये पर पड़े तबके, बच्चों, दिव्यांगो व बुजुर्गों को देने लिए बहुत कम प्रावधान किए गए हैं।

‘नेशनल प्लेटफॉर्म फॉर राइट्स ऑफ डिसएबल्ड’ (एनपीआरडी) ने एक बयान में दावा किया कि दिव्यांग समुदाय की लगातार उपेक्षा की गई है।

उसमें कहा गया है, “ जहां तक दिव्यांग समुदाय का संबंध है तो इस साल के बजट में भी कुछ अलग नहीं है। ”

एनपीआरडी ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस क्षेत्र के लिए आवंटन में केवल एक प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि वित्त वर्ष 2022-2023 के लिए आवंटित 196 करोड़ रुपये की राशि का पूरा उपयोग नहीं हुआ।

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम को लागू करने के वास्ते योजना के लिए आवंटित रकम को 90 करोड़ रुपये कर 150 करोड़ रुपये कर दिया गया जबकि यह पिछले साल 240.39 करोड़ रुपये (बजट अनुमान) थी।

एनपीआरडी ने कहा कि यह भी दुखद है कि भारतीय राष्ट्रीय न्यास और पुर्नवास परिषद जैसी संसद के अधिनियम के तहत स्थापित की गई अहम स्वायत्त संस्थाओं का आवंटन भी जस का तस है।

इसने दिव्यांगजनों के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में आय मानदंड को हटाने के सरकार के कदम की भी आलोचना की।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के लिए आवंटन में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह पिछले की तरह 290 करोड़ रुपये है।

एनपीआरडी ने कहा, “ सरकार ने पेंशन का दायरा और राशि दोनों नहीं बढ़ाए। राशि एक दशक से अधिक वक्त से नहीं बढ़ी है और यह 300 रुपये है। इसके दायरे में सिर्फ 3.8 फीसदी दिव्यांग आबादी आती है जिसकी पहचान 2011 की जनगणना में की गई थी।”

बुजुर्गों के जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले ‘हेल्पएज इंडिया’ ने वेतनभोगी मध्य वर्ग को कर राहत देने का स्वागत किया और कहा कि इससे वरिष्ठ नागरिकों को भी फायदा होगा।

’हेल्पएज इंडिया’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रोहित प्रसाद ने कहा, “हम वरिष्ठ नागरिकों के लिए लागू कुछ प्रावधानों से संबंधित विशिष्ट कर उपायों और मौजूदा सीमाओं में वृद्धि की उम्मीद कर रहे थे।”

उसने कहा, “कई वरिष्ठ नागरिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं और कर दायरे से बाहर हैं और या तो गरीबी रेखा के करीब या उससे नीचे जी रहे हैं, उनके लिए हम विशेष रूप से सामाजिक सुरक्षा उपायों के पक्षधर थे जिससे उन्हें लाभ होता।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)