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देश की खबरें | सीएए के खिलाफ अब प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं, आंदोलनकारी उच्चतम न्यायालय जाएं: असम के मुख्यमंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि इस समय नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ किसी प्रदर्शन की कोई प्रासंगिकता नहीं है और कानून के खिलाफ लोग उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

देश की खबरें | सीएए के खिलाफ अब प्रदर्शन का कोई मतलब नहीं, आंदोलनकारी उच्चतम न्यायालय जाएं: असम के मुख्यमंत्री

गुवाहाटी, 29 फरवरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि इस समय नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ किसी प्रदर्शन की कोई प्रासंगिकता नहीं है और कानून के खिलाफ लोग उच्चतम न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

शर्मा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संसद, जिसने कानून पारित किया था, ‘सर्वोच्च नहीं’ है क्योंकि शीर्ष अदालत इसके ऊपर है और वह किसी भी कानून को रद्द कर सकती है जैसा उसने चुनावी बांड के मामले में किया।

उन्होंने कहा, ‘‘सीएए के खिलाफ प्रदर्शन की कोई प्रासंगिकता नहीं है क्योंकि आंदोलन संसद द्वारा पारित किसी कानून के संबंध में कारगर नहीं हो सकते। बदलाव केवल उच्चतम न्यायालय में हो सकता है जैसा कि उसने भाजपा द्वारा लागू चुनावी बांड के मामले में किया।’’

शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका को किसी अधिनियम में बदलाव का अधिकार है और इसके अलावा संसद का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भी हो चुका है तथा अगले चार महीने तक कोई भी सीएए को निष्प्रभावी करने के लिए दोनों सदनों की बैठक नहीं बुला सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘सीएए वास्तविकता है और यह भारत में कानून की किताब में शामिल है। यह पिछले दो साल से भारत की विधि पुस्तिका में है। दिल से सीएए से नफरत करने वालों को उच्चतम न्यायालय जाना होगा। सीएए से राजनीतिक कॅरियर बनाना चाह रहे लोग आंदोलन कर सकते हैं। दोनों में अंतर है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि हो सकता है कि किसी को सीएए पसंद नहीं हो लेकिन वह इस भावना का सम्मान करते हैं तो यही बात दूसरे पक्ष की ओर से भी होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी की भी आलोचना नहीं करना चाहता क्योंकि सीएए को पसंद या नापसंद करना उनका अधिकार है। लेकिन दोनों पक्षों का समाधान उच्चतम न्यायालय में निकलना चाहिए, ना कि असम की सड़कों पर। लोकसभा और राज्यसभा ने लोकतांत्रिक तरीके से सीएए को पारित किया था। अब आप इसके बारे में क्या कर सकते हैं? आप (प्रदर्शन करके) कुछ नहीं कर सकते।’’

शर्मा ने प्रदर्शन के उद्देश्य पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, ‘‘असम की जनता ने विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया था, लेकिन फिर भी यह पारित हुआ। हालांकि, लोकसभा और राज्यसभा सर्वोच्च निकाय नहीं हैं और उच्चतम न्यायालय उनके ऊपर है।’’

इस विवादास्पद कानून के खिलाफ नये सिरे से प्रदर्शनों से आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा पर असर पड़ने की संभावना के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कोई टिप्पणी नहीं की।

लेकिन उन्होंने कहा, ‘‘मुझे वास्तव में लगता है कि सीएए के खिलाफ जो लोग हैं और जो इसके पक्ष में हैं, उन्हें उच्चतम न्यायालय जाना चाहिए।’’

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले हिंदुओं, जैन, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों को यहां पांच साल रहने के बाद भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है।

असम के विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर कहा कि अगर सीएए को निरस्त नहीं किया गया तो वे राज्यभर में ‘लोकतांत्रित तरीके से जन आंदोलन’ करेंगे।

सोलह दलों वाले संयुक्त विपक्षी मंच असम (यूओएफए) ने मुर्मू को संबोधित एक ज्ञापन राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को सौंपा।

यूओएफए में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), रायजोर दल, एजेपी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी), शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद चंद्र पवार(राकांपा-शरद पवार), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां शामिल हैं।

यूओएफए ने बुधवार को घोषणा की थी कि इस विवादास्पद अधिनियम के लागू होने के अगले ही दिन राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया जाएगा, जिसके बाद जनता भवन (सचिवालय) का 'घेराव' किया जाएगा।

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(The above story first appeared on LatestLY on Feb 29, 2024 10:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).