मुंबई, 10 जुलाई : शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (उबाठा) नेता संजय राउत ने बृहस्पतिवार को कहा कि महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय और नगर निकाय चुनावों के लिए ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) या महा विकास आघाडी (एमवीए) जैसी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है. सदस्य ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘एमवीए का महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों और ‘इंडिया’ गठबंधन का लोकसभा चुनावों के लिए गठन किया गया था. निकाय चुनावों के लिए ऐसे गठबंधनों की कोई आवश्यकता नहीं है.’’ देश भर के लगभग दो दर्जन दल ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं जबकि एमवीए में कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार (राकांपा-एसपी) शामिल हैं. राउत ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर मुंबई और अन्य शहरों में जनता के रुख का भी जिक्र किया.
राउत ने कहा, ‘‘लोगों की ओर से दबाव है कि शिवसेना (उबाठा) और मनसे को मुंबई एवं राज्य के अन्य शहरों में निकाय चुनाव मिलकर लड़ना चाहिए. चूंकि चुनावों की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए हम उचित समय पर निर्णय लेंगे.’’ बृहन्मुंबई महानगरपालिका समेत महाराष्ट्र नगर निकायों के चुनाव इस साल के अंत में होने की संभावना है. बाल ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना का लगभग दो दशकों तक बीएमसी पर नियंत्रण रहा. शिवसेना 2022 में विभाजित हो गई थी. राउत की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना नेता एवं राज्य मंत्री उदय सामंत ने शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन को लेकर कटाक्ष किया. यह भी पढ़ें : Manipur: मणिपुर में विस्थापितों के लिए मकानों के निर्माण को लेकर कोई निविदा जारी नहीं की गई; कांग्रेस
सामंत ने उद्धव ठाकरे की पार्टी पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा, ‘‘गठबंधन बनने के बाद एक पार्टी केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की कोशिश करेगी.’’ सामंत ने राज ठाकरे और शिवसेना (उबाठा) खेमे के हालिया सार्वजनिक बयानों के बीच अंतर को भी रेखांकित किया तथा इस महीने की शुरुआत में हुई दोनों दलों की संयुक्त रैली का जिक्र किया. उन्होंने महाराष्ट्र विधानभवन के परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘राज ठाकरे ने मराठी समुदाय की चिंताओं के बारे में बात की, जबकि दूसरे (उद्धव) ने केवल राजनीति के बारे में बात की.’’ राज ने कुछ दिन पहले मुंबई में उद्धव के साथ ‘आवाज मराठीचा’ नामक एक विजय समारोह में मंच साझा किया था. इसका आयोजन महाराष्ट्र के विद्यालयों में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी के रूप में शामिल करने संबंधी सरकार के दो सरकारी प्रस्तावों को वापस लिए जाने के उपलक्ष्य में किया गया था.













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