जरुरी जानकारी | भारत में वैकल्पिक ईंधन को अपनाने के लिए स्पष्ट नीति की जरूरत: एचएमएसआई

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया (एचएमएसआई) ने कहा है कि देश में वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और इसका क्रियान्वयन करने के लिए एकदम स्पष्ट और स्थिर नीतिगत रूपरेखा जरूरी है।

जापान की दोपहिया वाहन विनिर्माता ने कहा कि कंपनी सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप काम कर रही है, लेकिन ईंधन आपूर्ति तथा दामों से संबंधित चुनौतियों को दूर करने की जरूरत है।

एचएमएसआई के अध्यक्ष, मुख्य कार्यालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक अत्सुशी ओगाटा ने वाहन विनिर्माताओं के संगठन सियाम के एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘जैव ईंधन के लाभों को प्राप्त करने के लिए स्पष्ट, सुसंगत और स्थिर नीति का होना महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने ‘फ्लैक्स फ्यूल इंजन’ के संबंध में चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च गुणवत्ता के एथनॉल की सतत आपूर्ति घरेलू वाहन उद्योग के लिए चिंता का प्रमुख विषय है।

ओगाटा ने कहा कि ब्राजील में सरकार ने ‘फ्लैक्स फ्यूल व्हिकल’ को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिए, इसी प्रकार कराधान में प्रोत्साहन मिलने से देश में वैकल्पिक ईंधन रणनीति को शुरू करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘‘होंडा में हम ऐसे उत्पाद विकसित करने का भरोसा दिलाते हैं जो एथनॉल के मिश्रण के अनुरूप होंगे, सरकार की रूपरेखा का पालन करते हुए यह चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।’’

भारत ने 20 फीसदी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल या ‘ई-20’ के लिए समयसीमा पांच साल बढ़ाकर 2025 कर दी है। सरकार चाहती है कि इस पड़ाव को पाने के बाद वाहन उद्योग ‘फ्लैक्स फ्यूल’ इंजन की दिशा में बढ़ जाए।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी 85 फीसदी जरूरत के लिए आयात पर निर्भर है। 2025 तक 20 फीसदी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल के लक्ष्य को पाने से देश सालाना करीब 30,000 करोड़ रुपये की बचत कर लेगा और वायु प्रदूषण पर भी रोक लगेगी।

सरकार की नीति के मद्देनजर वाहन विनिर्माता भी ऐसे इंजन बना रहे हैं, जो ‘ई-20’ ईंधन के अनुकूल हों।

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