नयी दिल्ली, 21 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तमिलनाडु में तिरुचिरापल्ली जिले के दलित ईसाई ग्रामीणों की उस याचिका पर विचार करने पर सहमति व्यक्त की, जिसमें कोट्टापलायम पैरिश क्षेत्र में जाति आधारित अत्याचार, छुआछूत और भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने नोटिस जारी कर तमिलनाडु सरकार और गिरजाघर के अधिकारियों से 15 अप्रैल तक जवाब मांगा है।
जे. दोस प्रकाश समेत याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए अधिवक्ता फ्रैंकलिन सीजर थॉमस ने क्षेत्र के दलित ईसाइयों के साथ दिन-प्रतिदिन के मामलों में होने वाले भेदभाव पर प्रकाश डाला।
याचिका में आरोप लगाया गया है, ‘‘आज की तारीख में, याचिकाकर्ताओं के साथ-साथ अन्य दलित कैथोलिक ईसाई समुदाय के गांव के निवासियों को बहुसंख्यक जाति समुदाय की जातिगत आक्रामकता के कारण अस्पृश्यता की पारंपरिक प्रथा और अमानवीय, जाति-आधारित भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।’’
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर जिला और राज्य प्राधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिया, लेकिन किसी भी प्राधिकारी द्वारा कोई उचित या पूर्ण कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में कहा गया है कि पिछले साल 30 अप्रैल को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी क्योंकि उसका मानना था कि इस तरह के मुद्दे को दीवानी अदालत में सुलझाया जा सकता है और अंतिम फैसला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को लेना चाहिए।
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