चेन्नई, 24 मई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 मई को नये संसद भवन में स्थापित किए जाने वाले राजदंड (सेंगोल) का संबंध तमिल इतिहास से है जो लगभग 2,000 साल पुराने संगम काल का है।
ब्रिटिश शासन द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के प्रतीक स्वरूप प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दिए गए ऐतिहासिक सेंगोल को नये संसद भवन में स्थापित किया जाएगा। यह राजदंड (सेंगोल)अभी इलाहाबाद के एक संग्रहालय में रखा हुआ है।
1947 में मूल सेंगोल बनाने में शामिल रहे दो लोगों, 96 वर्षीय वुम्मिदी एथिराजुलु और 88 वर्षीय वुम्मिदी सुधाकर के नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शामिल होने की उम्मीद है।
तमिल विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एस. राजावेलु ने कहा कि राजाओं के राज्याभिषेक का नेतृत्व करने और सत्ता के हस्तांतरण को पवित्र करने के लिए समयाचार्यों (आध्यात्मिक गुरुओं) के लिए यह एक पारंपरिक चोल प्रथा थी, जिसे शासक को मान्यता देने के तौर पर देखा जाता था।
उन्होंने कहा, ‘‘तमिल राजाओं के पास यह सेंगोल (राजदंड के लिए तमिल शब्द) था, जो न्याय और सुशासन का प्रतीक है। दो महाकाव्यों - सिलपथिकारम और मणिमेकलई - में सेंगोल के महत्व का उल्लेख किया गया है।’’
राजावेलु ने कहा कि संगम काल से ही ‘राजदंड’ का उपयोग खासा प्रसिद्ध रहा है। उन्होंने कहा कि तमिल काव्य ‘तिरुक्कुरल’ में सेंगोल को लेकर एक पूरा अध्याय है।
राजावेलु ने पीटीआई- को बताया कि प्राचीन शैव मठ थिरुववदुथुराई आदिनम मठ के प्रमुख ने नेहरू को 1947 में सेंगोल भेंट किया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY