इम्फाल/अगरतला, चार जनवरी विकास के साथ राजनीति का तड़का लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मणिपुर, त्रिपुरा और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की पूर्ववर्ती सरकारों पर क्षेत्र के विकास की अनदेखी करने और लोगों के बीच दूरियां बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोगों के इसी ‘‘दर्द’’ को पाटने के लिए 2014 के बाद वह भारत सरकार को ही उनके दरवाजे पर लेकर आ गए।
उन्होंने मणिपुर और त्रिपुरा में अवसंरचना विकास व जन कल्याण की विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया और कहा कि आज ‘‘डबल इंजन’’ की सरकारों की वजह से इस क्षेत्र में उग्रवाद और असुरक्षा की आग नहीं है, बल्कि शांति और विकास की रोशनी है।
ज्ञात हो कि पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या उसके सहयोगियों की सरकारें हैं।
प्रधानमंत्री ने चुनावी राज्य मणिपुर में जहां 4800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 22 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया वहीं त्रिपुरा में महाराजा बीर बिक्रम हवाई अड्डे पर निर्मित नए एकीकृत टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया तथा त्रिपुरा ग्राम समृद्धि योजना व विद्याज्योति स्कूल परियोजना मिशन 100 की शुरुआत की।
दोनों ही राज्यों में अपने संबोधनों में प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों को आड़े हाथों लिया और कहा कि भाजपा की ‘‘डबल इंजन’’ की सरकारों की बदौलत आज पूर्वोत्तर के राज्य विकास की नयी इबारत लिख रहे हैं और इसका असर यह हुआ कि पूरे पूर्वोत्तर में सैकड़ों नौजवान आज हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने मणिपुर की जनसभा में कहा, ‘‘पूर्वोत्तर को लेकर पहले की सरकारों की नीति थी ‘डोंट लुक ईस्ट’ यानी पूर्वोत्तर की तरफ दिल्ली में तभी देखा जाता था, जब यहां चुनाव होते थे, लेकिन हमने पूर्वोत्तर के लिए ‘लुक ईस्ट’ का संकल्प लिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के विकास का प्रवेश द्वार बन रहा है...नए भारत के सपनों को पूरा करने का प्रवेश द्वार बन रहा है...और इसमें मणिपुर और पूर्वोत्तर, भारत के भविष्य में नए रंग भर रहे हैं।’’
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था जब मणिपुर और पूर्वोत्तर को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, क्योंकि पहले दिल्ली में बैठी सरकारें सोचती थीं कि कौन इतनी तकलीफ उठाए और कौन इतनी दूर जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जब प्रधानमंत्री नहीं बना था, उससे पहले भी अनेक बार मणिपुर आया था। मैं जानता था कि आपके दिल में किस बात का दर्द है। इसलिए 2014 के बाद मैं पूरी दिल्ली को... भारत सरकार को... आपके दरवाजे पर लेकर आ गया। वह चाहे नेता हो या मंत्री हो या अफसर हो।’’
उन्होंने लोगों को याद दिलाया कि आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में पूर्वोत्तर के पांच प्रमुख चेहरे हैं जो देश के अहम मंत्रालयों का कामकाज संभाल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार की सात वर्षों की मेहनत का असर अब पूर्वोत्तर में दिख रहा है... मणिपुर में दिख रहा है। आज मणिपुर और पूर्वोत्तर बदलाव की नयी कार्य संस्कृति के प्रतीक बन रहे हैं।’’
मणिपुर को केंद्र सरकार की विभिन्न परियोजनाओं के मिल रहे लाभों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि क्योंकि राज्य की जनता ने केंद्र व प्रदेश में भाजपा को अपना समर्थन दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘एक वोट की शक्ति ने मणिपुर में वह काम करके दिखाया, जिसकी पहले कोई कल्पना नहीं कर सकता था। अभी हमें आगे एक लंबा सफर तय करना है।’’
पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला जारी रखते हुए मोदी ने कहा ‘‘ पिछली सरकारों ने मणिपुर को ‘‘ब्लॉकेड स्टेट’’ बना कर रख दिया था, घाटी और तराई क्षेत्रों के बीच राजनीतिक फायदे के लिए खाई खोदने का काम किया गया था, लोगों के बीच दूरियां बढ़ाने के लिए खेल किए जाते थे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आज डबल इंजन की सरकार के प्रयासों की वजह से इस क्षेत्र में उग्रवाद और असुरक्षा की आग नहीं है, बल्कि शांति और विकास की रोशनी है। पूरे पूर्वोत्तर में सैकड़ों नौजवान हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। जिन समझौतों का दशकों से इंतजार था, हमारी सरकार ने वह ऐतिहासिक समझौते भी कर दिखाए।’’
मणिपुर में एक स्थिर सरकार बनाने के लिए राज्य की जनता का धन्यवाद करते हुए मोदी ने कहा कि आज वह सरकार पूरे बहुमत और दमखम से चल रही है।
मोदी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता हासिल करने के लिए मणिपुर को फिर से ‘‘अस्थिर’’ करना चाहते हैं और उम्मीद लगाए बैठे हैं कि कब उन्हें मौका मिले ताकि वह ‘‘अशांति का खेल’’ खेल सकें।
ज्ञात हो कि मणिपुर में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
अगरतला की जनसभा में मोदी ने पूर्ववर्ती वामपंथी सरकारों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनके पास ना तो विकास की कोई दृष्टि थी और ना ही कोई नीयत जबकि पूर्वोत्तर के इस राज्य में आज एक ऐसी संवेदनशील सरकार है, जिसे विकास के हर क्षेत्र में अग्रणी रहने की आदत बन गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले यहां भ्रष्टाचार की गाड़ी रुकने का नाम नहीं लेती थी और विकास की गाड़ी पर ब्रेक लगा हुआ था।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले जो सरकार यहां थी उसमें त्रिपुरा के विकास का ना विजन (दृष्टिकोण) था और ना ही उसकी नीयत थी। गरीबी और पिछड़ेपन को त्रिपुरा के भाग्य के साथ चिपका दिया गया था।’’
मोदी ने कहा कि इस स्थिति को बदलने के लिए ही उन्होंने त्रिपुरा के लोगों को एचआईआरए यानी हीरा का आश्वासन दिया था। इसमें एच का मतलब हाइवे (राजमार्ग), आई का इंटरनेट-वे, आर का रेलवे और ए का एयर-वे (वायुमार्ग) है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हीरा मॉडल पर त्रिपुरा अपना संपर्क सुधार रहा है और उसे आगे बढ़ा रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि त्रिपुरा में आधुनिक संसाधनों के विकास पर जितना निवेश आज हो रहा है उतना कभी नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा का तेज गति से विकास इसलिए संभव हो सका क्योंकि वहां ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार है।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र और राज्य में जब विकास को सर्वोपरि रखने वाली है सरकार होती है तो दोगुनी तेजी से काम भी होता है। इसलिए डबल इंजन की सरकार का कोई मुकाबला ही नहीं है। डबल इंजन की सरकार यानी संसाधनों का सही इस्तेमाल, भरपूर संवेदनशीलता, लोगों के सामर्थ्य को बढ़ावा, सेवा व समर्पण भाव, संकल्पों की सिद्धि और समृद्धि की तरफ एकजुट प्रयास।’’
प्रधानमंत्री ने ‘‘डबल इंजन’’ की सरकार होने से विकास कैसे होता है, इसका एक उदाहरण देते हुए कहा कि त्रिपुरा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) शुरु होने पर उसकी परि को लेकर एक मुश्किल आई थी। उस परि के मुताबिक उसे कच्चा घर नहीं माना जाता जिसकी छत लोहे की चादर की बनी हो।
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