देश की खबरें | विपक्ष ने कर्नाटक के बजट में ‘‘विकास के बजाय तुष्टीकरण’’ को प्राथमिकता देने पर सरकार की आलोचना की

बेंगलुरु, सात मार्च कर्नाटक में विपक्षी दलों ने शुक्रवार को पेश राज्य के बजट में ‘‘असल विकास के बजाय तुष्टीकरण को प्राथमिकता’’ देने पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया नीत कांग्रेस सरकार की आलोचना की।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र ने कर्नाटक बजट 2025-26 को ‘‘प्रगति नहीं, बल्कि तुष्टीकरण के लिए कांग्रेस का खाका’’ बताते हुए आरोप लगाया कि जब किसान कर्ज और फसलों को हुए नुकसान से जूझ रहे हैं, ग्रामीण कर्नाटक सड़क, बिजली और सिंचाई की कमी से जूझ रहा है, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) छात्रावासों को पर्याप्त वित्तपोषण नहीं मिल रहा, युवा कौशल विकास एवं नौकरियों से वंचित हैं, तब ऐसे समय में कांग्रेस ने ‘‘असल विकास के बजाय तुष्टीकरण को प्राथमिकता दी है।’’

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि राज्य के बजट में मौलाना आजाद विद्यालयों के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि ग्रामीण सरकारी विद्यालयों को कम धन दिया जाता है। उन्होंने कहा कि केवल अल्पसंख्यकों के लिए विशेष व्यावसायिक योजनाएं हैं, जबकि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और ग्रामीण उद्यमियों को कोई समर्थन नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन को दरकिनार करते हुए ग्रामीणों के लिए नौकरियों में कोई बड़ा निवेश नहीं किया गया, जबकि वोट बैंक की राजनीति केंद्र में है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि युवाओं के लिए कौशल विकास और शिक्षा की अनदेखी की गई तथा उन्हें उद्योग के लिए तैयार करने के लिए कोई वास्तविक प्रयास नहीं किया गया।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया द्वारा पेश राज्य के बजट को लेकर निराशा जताते हुए इसे ‘‘अदूरदर्शी और अव्यवस्थित बजट’’ कहा।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ‘‘चूंकि सिद्धरमैया निवर्तमान मुख्यमंत्री हैं, इसलिए कन्नड़ लोगों को इस बजट से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं। इस बजट ने हालांकि उन लोगों को पूरी तरह निराश किया है, जो उम्मीद कर रहे थे कि वह अपने आखिरी बजट में कम से कम कुछ जनहितैषी योजनाओं की घोषणा करेंगे। यह एक फर्जी बजट है।’’

भाजपा के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आरोप लगाया कि इस सरकार की उपलब्धि यह है कि उसने अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की अपनी नीति को बजट में भी लागू कर दिया है और विकास कार्यों की अनदेखी की गई है।

जनता दल (सेक्युलर) नेता और केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच डी कुमारस्वामी ने राज्य के बजट को ‘‘विश्वासघात का बजट’’ करार देते हुए कहा, ‘‘कुछेक लोगों को तरजीह दी गई! अधिकतर लोगों की उपेक्षा की गई। यह सरकार के बजट का असली चेहरा है - विकास के बजाय तुष्टीकरण।’’

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