ताजा खबरें | नैनो तरल यूरिया का उत्पादन करने वाले संयंत्रों की संख्या 2025 तक 13 हो जाएगी :मांडविया

नयी दिल्ली, 12 दिसंबर रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि देश में नैनो तरल यूरिया का उत्पादन करने वाले संयंत्रों की कुल संख्या 2025 तक बढ़कर 13 हो जाएगी, जो अभी नौ है।

इन संयंत्रों में 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया और डीएपी (डाइ-अमोनियम फॉस्फेट) की 44 करोड़ बोतलों का उत्पादन होगा जिनसे घरेलू मांग को पूरा करने और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

मांडविया ने एक प्रश्न के उत्तर में राज्यसभा को बताया, "नौ संयंत्र पहले से चालू हैं और 2025 के अंत तक 13 संयंत्र चालू हो जाएंगे, जिनमें 44 करोड़ बोतलों का उत्पादन होगा।’’ उन्होंने कहा कि इससे स्थिति में व्यापक बदलाव आएगा और न केवल नैनो यूरिया की घरेलू आवश्यकता पूरी होगी बल्कि निर्यात को भी बल मिलेगा।

सरकार ड्रोन तकनीक का उपयोग करके खेतों में नैनो-यूरिया के छिड़काव के लिए एक तंत्र स्थापित कर रही है। ‘‘विकसित भारत संकल्प यात्रा’’ के तहत किसानों को ड्रोन के जरिए नैनो यूरिया के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मांडविया ने कहा, ''नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग बड़े पैमाने पर वैकल्पिक उर्वरक के तौर पर स्वीकार किया जाता है।''

मंडाविया ने कहा कि सरकार ने उर्वरक क्षेत्र में कई बदलाव किया है। उन्होंने कहा, ‘‘परंपरागत रूप से, हम यूरिया, डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कर रहे थे और सरकार ने वैकल्पिक जैव उर्वरकों के लिए पहल की है।’’

उन्होंने कहा कि इससे उर्वरकों के आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी तरीकों से उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिली है।

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