देश की खबरें | त्रिपुरा के तृष्णा अभ्यारण्य में में बढ़ रही है गौर की संख्या

अगरतला, 11 जुलाई शिकारियों, जलवायु परिवर्तन और सिकुड़ते अधिवास के खतरे का सामना कर रहे भारतीय जंगली भैंसा या ‘गौर’ लंबे समय से विलुप्तप्राय जंतुओं की ‘लाल’ सूची में हैं।

हालांकि, हाल में यहां राजबारी में तृष्णा अभ्यारण्य में कम से कम पांच बछड़ों के जन्म लेने से पूर्वोत्तर राज्य में पाए जाने वाले इस जंतु के लिए उम्मीद की एक नयी किरण आई है।

राज्य के वन्यजीव संरक्षक नीरद बरन देबनाथ ने बताया कि इस साल मार्च में वन अधिकारियों द्वारा जंतुओं की गणना के दौरान अभ्यारण्य के कोर क्षेत्र में पांच बछड़े देखे गये। वे स्वस्थ थे और अपनी माताओं के साथ झुंड में चल रहे थे।

उन्होंने बताया कि गणना में यह पाया गया कि अभ्यारण्य में 105 गौर हैं। नवजात बछड़ों के साथ उनकी कुल संख्या बढ़ कर 110 हो गई है।

उल्लेखनीय है कि गौर 1986 सेआईयूसीएन की लाल सूची में जोखिमग्रस्त के तौर पर सूचीबद्ध है।

मुख्य वन्यजीव संरक्षक रामेश्वर दास ने कहा कि अभ्यारण्य को शिकारियों से बचाने के लिए उठाये गये कदमों के कारण गौर की संख्या बढ़ रही है।

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