देश की खबरें | उपराज्यपाल ने 244 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति रोकने के लिए सेवा विभाग को अपने हाथ में लिया: सिसोदिया

नयी दिल्ली, पांच फरवरी दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को उपराज्यपाल वी के सक्सेना पर सरकारी स्कूलों में 244 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति रोकने और असंवैधानिक तरीके से सेवा विभाग को अपने नियंत्रण में लेने का आरोप लगाया।

शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सिसोदिया ने रविवार को संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि अगर सेवा विभाग दिल्ली सरकार के पास होता तो ‘‘ हर विद्यालय के पास अपना स्थायी प्राचार्य होता।’’

इससे एक दिन पहले सक्सेना ने सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों और उप शिक्षा अधिकारियों के 126 पदों की बहाली की मंजूरी दे दी थी, जो पिछले दो साल से अधिक समय से ‘‘खाली’’ पड़े रहने के कारण खत्म हो गये थे।

सिसोदिया ने कहा, ‘‘...बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से उपराज्यपाल ने दावा किया है कि उन्होंने प्रधानाचार्य के खत्म हो चुके 126 पदों को बहाल किया है। वास्तविकता यह है कि उपराज्यपाल ने 244 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति की मंजूरी रोक रखी है और विभाग से कहा है कि वे आकलन करें कि क्या इन प्रधानाचार्यों की स्कूलों में जरूरत है या नहीं। ये पद पिछले पांच सालों से खाली पड़े हैं। यह किस तरह का मजाक है?’’

राजनिवास के अधिकारियों ने शनिवार को कहा था कि 126 पद ‘‘आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की उदासीनता और निष्क्रियता’’ की वजह से खत्म हो गए थे।

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा पेश हास्यास्पद ‘झूठ का पुलिंदा’ है। उपराज्यपाल ने दिल्ली में शासन व्यवस्था को मजाक बना दिया है, ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके पास सेवा विभाग को नियंत्रित करने का अंसवैधानिक अधिकार है। अगर उपराज्यपाल ने सेवा विभाग को अंसवैधानिक रूप से अपने नियंत्रण में नहीं लिया होता तो आज हर स्कूल के पास अपना स्थायी प्रधानाचार्य होता।’’

केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार और सक्सेना को निशाना बनाते हुए सिसोदिया ने कहा कि वे सेवा विभाग को अपने नियंत्रण में रखने के लिए ‘अड़े हुए’ हैं लेकिन प्रधानाचार्यों की नियुक्ति को लेकर प्रतिबद्ध नहीं।

उन्होंने कहा, ‘‘उपराज्यपाल ने तो सेवा विभाग के अधिकारियों को शिक्षा मंत्री को फाइल दिखाने के नियम की अनदेखी करने को भी कहा है। इतना ही नहीं उपराज्यपाल ने विधानसभा के सवालों का जवाब देने से भी मना कर दिया जो सरकार को बजट देती है।’’

सिसोदिया ने कहा कि उन्होंने सुनिश्चित किया कि 370 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति की फाइल राज्यपाल को भेजी जाए क्योंकि इन स्कूलों का प्रशासन प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘2015 से ही हम स्कूलों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेज रहे हैं। इन वर्षों में स्कूलों की संख्या बढ़ी है और सेवारत प्रधानाचार्य सेवानिवृत्त हुए हैं। उपराज्यपाल स्कूलों में प्रधानाचार्यों की जरूरत पर अध्ययन करने को कहकर दिल्ली की शिक्षा प्रणाली का माखौल उड़ा रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि ये स्कूल उपप्रधानाचार्यों के अधीन काम कर रहे हैं और ‘‘उपराज्यपाल इन प्रधानाचार्यों की नियुक्ति करने की अनुमति नहीं देकर दिल्ली सरकार के साथ धौंसपट्टी कर रहे हैं।’’

सिसोदिया ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति रिपोर्ट मांग रहा है कि स्कूलों में प्रधानाचार्य की जरूरत है या नहीं।’’

उन्होंने उपराज्यपाल से कहा कि वह स्कूलों में ‘प्रधानाचार्य की जरूरत है या नहीं’ के नाम पर दिल्ली सरकार के काम को बाधित करना छोड़ें। उन्होंने कहा,‘‘ यह मजाक नहीं है बल्कि स्कूलों को चलाने संबंधी गंभीर मुद्दा है। ’’

सिसोदिया ने कहा कि 2015 में जब आप सत्ता में आई तब सेवा विभाग मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अधीन था।

उन्होंने कहा, ‘‘ तब प्रधानाचार्य की नियुक्ति का फैसला मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री द्वारा लिया जाता था। उस समय हमने कई नियुक्तियां की जो लंबे समय से लंबित थी। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा प्रधानाचार्य के लिए जारी पद वर्ष 2010 से खाली थे। हमने उसके बाद 370 प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा। जैसे ही हमने प्रस्ताव भेजा उपराज्यपाल ने असंवैधानिक रूप से सेवा विभाग को अपने अधीन कर लिया।’’

सिसोदिया ने कहा कि यूपीएससी ने 370 पदों को लेकर कुछ सवाल किए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘उप राज्यपाल ने सेवा विभाग को अपने अधीन कर लिया लेकिन उनके अधिकारियों ने यूपीएससी को कभी संतोषजनक उत्तर नहीं दिया। प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का मुद्दा उपराज्यपाल के पास आठ साल से है लेकिन अबतक कुछ नहीं हुआ है।’’

मंत्री ने दावा किया कि दो साल पहले उन्होंने अनौपचारिक रूप से हस्तक्षेप किया और तब अधिकारियों ने यूपीएससी से संपर्क किया और प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘ दिल्ली सरकार के हस्तक्षेप से 363 प्रधानाचार्यों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई। अब उनका साक्षात्कार हो रहा है, लेकिन इन 370 पदों को लेकर उप राज्यपाल ने यूपीएससी को संतोषजनक जवाब नहीं दिया।’’

मंत्री ने दावा किया कि जब भी उन्होंने सेवा विभाग के अधिकारियों से सवालों का उचित जवाब देने को कहा तो उन्होंने बताया कि उप राज्यपाल ने विशेष जवाब देने को कहा है।

उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर उप राज्यपाल सक्सेना को भी लिखेंगे, लेकिन उनसे आग्रह किया कि वह ‘तुच्छ आधार’ पर शेष पदों पर नियुक्तियों को न रोकें।

आम आदमी पार्टी (आप) के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 126 पदों को स्वीकृति देकर उपराज्यपाल ने भाजपा के ‘‘झूठ का पर्दाफाश’’ कर दिया है। भाजपा ने पहले स्कूलों में प्रधानाचार्यों की कमी के लिए आप को जिम्मेदार ठहराया था।

भारद्वाज ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘जब पिछले साल पंजाब विधानसभा चुनाव चल रहे थे, तो भाजपा और कांग्रेस ने स्कूलों में कोई प्रधानाचार्य नहीं होने का हवाला देते हुए हमारी शिक्षा प्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उपराज्यपाल ने आज भाजपा के झूठ का पर्दाफाश कर दिया और प्रधानाचार्यों के 126 पदों को मंजूरी दे दी। जब आप 2015 में सत्ता में आयी थी, तो हमने माना था कि स्कूलों में प्रधानाचार्यों की कमी है, हमने प्रधानाचार्यों के 370 पद भरने के लिए यूपीएससी को एक प्रस्ताव भेजा था।’’

आप नेता ने दावा किया कि जब मनीष सिसोदिया ने दिल्ली की शिक्षा प्रणाली की योजना बनायी थी, तो उन्होंने शहर के प्रत्येक स्कूल में प्रधानाचार्य होने पर जोर दिया था।

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