जयपुर, 30 जनवरी जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) का एक अधिकारी भारत में फलस्तीनी दूतावास के प्रभारी आबिद अल राज़ेग अबू जाजर के साथ ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया’ (पीटीआई) के साक्षात्कार में बृहस्पतिवार को जबरन घुस गया, एक महिला पत्रकार को धक्का दिया और बातचीत जबरन बीच में ही खत्म करा दी।
यह नाटकीय घटनाक्रम पांच दिवसीय उत्सव के 18वें संस्करण के उद्घाटन के दिन हुआ। जेएलएफ में इस वर्ष नोबेल पुरस्कार विजेताओं, बुकर पुरस्कार विजेताओं, पत्रकारों, नीति निर्माताओं और प्रतिष्ठित लेखकों सहित 300 दिग्गज भाग लेंगे।
अबू अजर साक्षात्कार के दौरान डाले गए व्यवधान से हैरान रह गए और उन्होंने अधिकारी से पूछा कि उन्हें किस अधिकार से समाचार एजेंसी से बात करने से रोका जा रहा है।
उन्होंने बाद में पीटीआई से कहा, ‘‘मैं यहां एक अतिथि के रूप में आया हूं और मुझे हमेशा से यह उत्सव पसंद रहा है। साक्षात्कार को बीच में ही रोक देने वाला व्यक्ति बहुत असभ्य और अशिष्ट था। एक राजनयिक के रूप में इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन इससे मीडिया के साथ जेएलएफ के व्यवहार पर सवाल उठते हैं।’’
जेएलएफ अधिकारी की पीटीआई के पत्रकारों और फलस्तीनी राजनयिक के साथ तीखी बहस हुयी। इस दौरान, जेएलएफ अधिकारी ने कहा कि उनकी पीआर टीम द्वारा ‘‘साक्षात्कार की अनुमति नहीं दी गई थी।
अधिकारी ने तर्क दिया कि अबू जाजर साहित्य उत्सव में ‘‘उत्सव के मित्र’’ की हैसियत से भाग ले रहे हैं, न कि वक्ता के रूप में।
उन्होंने कहा कि यह साक्षात्कार नहीं हो सकता क्योंकि ‘‘इसे जेएलएफ के बयान के रूप में नहीं लिया जा सकता।’’
हंगामे के बाद, जेएलएफ के वरिष्ठ प्रबंधन ने राजनयिक से मुलाकात की।
फलस्तीनी राजनयिक ने बाद में कहा कि उन्हें बातचीत के लिए मीडिया लाउंज का उपयोग नहीं करने के लिए कहा गया है क्योंकि वह वक्ता नहीं हैं।
आयोजन टीम के कई सदस्यों ने, जो कुछ हुआ, उसके लिए खेद जताया है। हालांकि, जेएलएफ प्रबंधन ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।
एक अधिकारी ने कहा कि साक्षात्कार मीडिया लाउंज के बाहर और ऐसे स्थान पर हो सकता है जहां जेएलएफ का ‘लोगो’ या नाम अंकित नहीं हो।
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