देश की खबरें | दुराचार व हत्या के आरोप में फांसी की सजा पाए युवक को उच्च न्यायालय ने बरी किया
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लखनऊ, दो जून इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने एक युवक को नाबालिग लड़की के साथ दुराचार करने व बाद में उसकी गला घोंटकर हत्या करने के मामले में बुधवार को बरी कर दिया ।

बाराबंकी की एक अदालत सात साल पहले इस मामले में आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी।

अदालत ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ युवक की अपील मंजूर करते हुए कहा कि अभियोजन इस मामले में अपने पक्ष को संदेह से परे नहीं साबित कर पाया ।

अदालत ने कहा कि वह इस बात से अवगत है कि साल की नाबालिग के साथ यह घटना घटी, किन्तु अभियेाजन के साक्ष्यों से अपीलकर्ता युवक द्वारा यह कृत्य किये जाने की पुष्टि नहीं होती।

युवक अप्रैल 2013 से जेल में है।

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा व न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने वीडियो कांफ्रेस से हुई सुनवाई के दौरान यह निर्णय सुनाया। पीठ ने 25 मार्च 2021 केा सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था।

गौरतलब हैं कि 30 मार्च 2013 को बाराबंकी के देवा थानाक्षेत्र के एक गांव में 12 साल की नाबालिग लड़की घर से बाहर गयी थी। वह वापस नहीं आयी तो घरवालों ने उसे ढूंढा तब गांव के ही एक बाग में उसकी लाश मिली। लड़की के पिता ने उसी दिन प्राथमिकी दर्ज करायी।

बाद में गांव के ही तीन लोगों की गवाही पर उभान यादव उर्फ अभय कुमार यादव को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया गया।

अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) बाराबंकी ने 29 अगस्त 2014 को युवक को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील की थी।

युवक को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियेाजन ने जिन तीन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को पेश किया, उन सभी के बयानों में भिन्नता है। साथ ही एफएसएल रिपेार्ट को अभियेाजन ने साबित नहीं की क्योंकि वह रिपेार्ट युवक केा निर्दोष करार दे रही थी।

सं जफर

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