नयी दिल्ली, तीन फरवरी आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस के सांसद एंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने राज्य में असामान्य हालात के बावजूद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण में इसके बारे में कोई उल्लेख नहीं होने पर नाखुशी जताते हुए कहा कि सरकार को मणिपुर को साथ लेकर चलना होगा और इसे एक अपवाद स्वरूप मामले की तरह देखना होगा।
लोकसभा में राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अकोइजम ने कहा, ‘‘मैं राष्ट्रपति अभिभाषण में मणिपुर के बारे में कुछ बातों की उम्मीद कर रहा था। लेकिन सत्तापक्ष ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। राष्ट्रपति के अभिभाषण में समावेश की बात कही गई है, लेकिन सच यह है कि यह सरकार समावेशी राजनीति में विश्वास नहीं रखती।’’
उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के सांसदों में और सरकार में एक भी मुस्लिम सदस्य नहीं है जबकि देश में 15 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है और इससे सरकार के समावेश के दावे का पता चल जाता है।
कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री कहते हैं कि राज्य का हिस्सा उनके नियंत्रण में है और एक हिस्सा केंद्रीय गृह मंत्री की कमान में है।
उन्होंने कहा कि यह संविधान के मद्देनजर अनुचित है।
चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सरकार हर बार ‘सभी के लिए घर’ की बात करती है, लेकिन झुग्गी में रहने वालों की स्थिति वैसी ही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार का हर कदम राजनीतिक होता है, सामाजिक नहीं। सावंत ने कहा कि सरकार ने बजट में 12 लाख रुपये की आय पर कर की छूट की घोषणा की है, लेकिन किसानों के लिए भी कुछ किया जाना चाहिए था।
चर्चा में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अमोल कोल्हे, शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बर्णे और समाजवादी पार्टी के वीरेंद्र सिंह ने भी भाग लिया।
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