देश की खबरें | बसंत पंचमी के अमृत स्नान पर्व से शुरू हुई वैष्णव अखाड़ों की अग्नि स्नान साधना

महाकुंभ नगर, तीन फरवरी महाकुंभ त्याग और तपस्या के साथ विभिन्न साधनाओं के संकल्प का भी पर्व है और इसी के तहत पंच धूनी तपस्या यानी अग्नि स्नान की शुरुआत सोमवार को बसंत पंचमी के अमृत स्नान पर्व से हो गई।

श्री दिगंबर अनी अखाड़े में महंत राघव दास ने बताया कि कुंभ क्षेत्र जप, तप और साधना का क्षेत्र है जिसके हर कोने में कोई न कोई साधक अपनी साधना में रत नज़र आएगा।

महाकुंभ के तपस्वी नगर में बसंत पंचमी से एक खास तरह की साधना का आरंभ हुआ है जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा कौतूहल है।

महंत राघव दास ने कहा कि इस साधना को पंच धूनी तपस्या कहा जाता है जिसे आम भक्त अग्नि स्नान साधना के नाम से भी जानते हैं।

उन्होंने कहा कि इस साधना में साधक अपने चारों तरफ जलती आग के कई घेरे बनाकर उसके बीच में बैठकर अपनी साधना करता है।

महंत राघव दास ने कहा कि जिस आग की हल्की से आंच के सम्पर्क में आने से इंसान की त्वचा झुलस जाती है उससे कई गुना अधिक आंच के घेरे में बैठकर ये तपस्वी अपनी साधना करते हैं।

उन्होंने कहा कि वैष्णव अखाड़े के खालसा में इस अग्नि स्नान की साधना की परम्परा है जो बेहद त्याग और संयम की स्थिति में पहुंचने के बाद की जाती है।

उनके अनुसार अग्नि साधना, वैष्णव अखाड़ों के सिरमौर अखाड़े दिगंबर अनी अखाड़े के अखिल भारतीय पंच तेरह भाई त्यागी खालसा के साधकों की विशेष साधना है। यह साधना अठारह वर्षों की होती है।

महंत राघव दास का कहना है कि इस अनुष्ठान को पूरा करने के पीछे न सिर्फ साधना के उद्देश्य की पूर्ति करनी होती है बल्कि साधु की क्षमता और सहनशीलता का परीक्षण भी होता है।

उनके मुताबिक लगातार 18 वर्ष तक साल के पांच माह इस कठोर तप से गुजरने के बाद उस साधु को वैरागी की उपाधि मिलती है।

राजेंद्र

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