देश की खबरें | इतालवी मरीनों की गोलीबारी के जद में आयी नौका में सवार व्यक्ति के परिवार ने इटली से मुआवजा मांगा

कोच्चि, 10 जुलाई केरल के एक परिवार ने इटली से 100 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है और दावा किया है कि उनका एक बच्चा आठ साल पहले इतालवी मरीनों की गोलीबारी की जद में आई नौका में सवार था और जिसने घटना के कारण अवसाद में आकर बाद में आत्महत्या कर ली थी।

परिवार के सदस्यों ने कहा है कि गोलीबारी की घटना के समय उनके बच्चे की उम्र 14 साल थी।

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उन्होंने केंद्र से अपील की कि उन्हें इटली से 100 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए।

इस परिवार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के सचिव को भेजे गए अपने आग्रह में छह जुलाई को दावा किया कि 15 फरवरी 2012 को केरल अपतटीय क्षेत्र में तेल टैंकर ‘एनरिका लेक्सी’ से इतालवी मरीनों द्वारा की गई गोलीबारी से प्रिजिन ए. डर गया था और उसे इस दौरान कुछ मामूली चोटें भी आई थीं।

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इस घटना में दो मछुआरे मारे गए थे।

परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि घटना से प्रिजिन बहुत परेशान हो गया था और बाद में वह अवसाद का शिकार हो गया। पिछले साल जुलाई में उसने आत्महत्या कर ली।

प्रिजिन तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के कंजामपुरम का निवासी था।

परिवार ने दावा किया कि प्रिजिन ‘एनरिका लेक्सी’ घटना का पीड़ित था।

इस परिवार में प्रिजिन की 59 वर्षीय मां तथा बहनों सहित आठ सदस्य हैं।

परिवार ने केंद्र से अपील की है कि वह उसे समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि के तहत गठित मध्यस्थता अदालत के निष्कर्ष के तहत इटली से मुआवजा दिलाए।

इसने एक वकील के माध्यम से मंत्रिमंडल सचिव को भेजे गए अपने आग्रह में कहा कि प्रिजिन को संरक्षण उपलब्ध नहीं कराया गया जिसका कि वह 14 साल की उम्र का होने के नाते अंतरराष्ट्रीय बाल अधिकार कानून और भारत गणराज्य के संविधान तथा इटली गणराज्य के प्रावधानों के अनुरूप हकदार था।

उसे मछली पकड़ने वाली नौका ‘सेंट एंथनी’ के मालिक फ्रेडी ने चालक दल के सदस्य के रूप में, साथ ही अन्य मछुआरों की मदद करने और खाना पकाने के लिए रखा था।

परिवार ने कहा कि घटना के बाद वह मछली पकड़ने वाली एक अन्य भारतीय नौका से तट पर आ गया था।

केरल तट पर पहुंचने के बाद प्रिजिन को नौका मालिक ने घर जाने को कहा।

परिवार ने कहा कि इस घटना के बाद वह बहुत परेशान हो उठा। वह ठीक से सो भी नहीं पाता था, अचानक जग जाता था और नींद में चिल्लाने लगता था।

इसने दावा किया कि फ्रेडी कई बार प्रिजिन से मिलने पहुंचा और आश्वासन दिया कि उसे न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

परिवार ने कहा कि बालक को न चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और न ही मनोवैज्ञानिक सहायता जिसने अजीश पिंक और अन्य मछुआरे जीलस्टाइन की ‘‘निर्मम हत्या’’ देखी।

परिवार का यह कदम हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत के निर्णय के लगभग एक सप्ताह बाद आया है।

मध्यस्थता अदालत ने कहा था कि मामले में भारत हालांकि मुआवजा पाने का हकदार है, लेकिन मरीनों को आधिकारिक छूट प्राप्त होने के कारण उनपर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

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