जम्मू, 19 जून सरकार द्वारा घाटी से विस्थापित होकर आए कश्मीरी पंडितों के लिए बनाई गईं बस्तियों पर बिजली शुल्क लगाने के जम्मू-कश्मीर प्रशासन के फैसले पर वहां के निवासियों ने आक्रोश जताया है और इसे वापस लेने की मांग की है।
जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग के पास जगती बस्ती में बसे सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने बिजली शुल्क वसूलने के आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग को लेकर सोमवार को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया।
जम्मू पावर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेपीडीसीएल) ने हाल के एक आदेश में विस्थापित शिविरों में रहने वाले उपभोक्ताओं से बिजली की खपत के लिए शुल्क वसूलने का निर्देश दिया है।
ऑल पार्टी एक्शन कमेटी माइग्रेंट कैम्प्स के अध्यक्ष एच. एन. रैना ने कहा, ‘‘हम सरकार से अपील करते हैं कि पिछले 33 वर्षों से विभिन्न शिविरों में रह रहे विस्थापित कश्मीरी पंडितों से बिजली बिल वसूलने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करें, जो घाटी में अपनी वापसी और पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ’’
विस्थापित शिविरों में बिजली का बिल पहले सुरक्षा और राहत उपाय निधि से दिया जाता था। जेपीडीसीएल ने 23 मई को आदेश जारी कर शिविरों में रहने वाले उपभोक्ताओं से बिजली की खपत के हिसाब से शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया था।
एच एन रैना ने कहा, ‘‘ शिविरों में कश्मीरी पंडित सरकारी राहत पर गुजारा कर रहे हैं और बिजली बिल देने की स्थिति में नहीं हैं। इस आदेश को रद्द करने की जरूरत है। ’’
उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी।
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