नयी दिल्ली, 15 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुंबई ट्रेन विस्फोट, 2006 के दोषी द्वारा केन्द्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। दोषी ने अपनी अर्जी में महाराष्ट्र सरकार द्वारा उसके खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने के लिए दी गई मंजूरी से जुड़ी जानकारी देने से इंकार करने के सीआईसी के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा कि याचिका में कोई गुण नहीं है और ऐसी जानकारी सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) के दायरे से बाहर है, के सीआईसी के रूख का समर्थन किया ।
अदालत ने माना कि गैरकानूनी गतिविधियां निषेध कानून (यूएपीए) के तहत मौत की सजा पाने वाले याचिकाकर्ता एतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी यह साबित करने में असफल रहा है कि उसके द्वारा मांगी गई सूचना ‘‘प्राप्त करने योग्य’’ है और वह कानून के दायरे से बाहर रखी गयी सूचनाओं के तहत नहीं आता है।
मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 जुलाई, 2006 में छह विस्फोट हुए थे जिसमें 189 लोगों की मौत हुई थी जबकि 829 लोग घायल हुए थे।
अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा, ‘‘ यूएपीए के प्रावधान 45 तक तहत किए गए प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए अदालत का स्पष्ट रूख है कि जो सूचना मांगी गयी है और अर्जी में जो अनुरोध किया गया है, उसके तहत प्रतिवादियों (सीआईसी) ने आरटीआई कानून के प्रावधान 8(1) (ए) का उचित उपयोग किया है।’’
आरटीआई कानून का प्रावधान 8(1)(ए) कहता है कि भारत की सम्प्रभुता और अखंडता, सुरक्षा, विरासत, राष्ट्र के वैज्ञानिक और आर्थिक हितों, विदेशों के साथ संबंध और अपराध के लिए भड़काता तो, ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक किए जाने से छूट है।
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