देश की खबरें | बस मार्शल को लेकर अवमानना याचिका पर मुख्य सचिव का रुख पूछा अदालत ने

नयी दिल्ली, 24 अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी की बसों में मार्शलों को कथित रूप से तैनात नहीं किये जाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर बृहस्पतिवार को दिल्ली के मुख्य सचिव नरेश कुमार और वित्त सचिव आशीष चंद्र वर्मा का रुख जानना चाहा।

न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि ‘डीटीसी’ की बसों में सफर कर रहे यात्रियों, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और याचिका में लगाये गये आरोप ‘स्तब्ध करने वाले’ हैं।

वकील अमित साहनी की अवमानना याचिका पर न्यायाधीश ने अधिकारियों को नोटिस जारी किया और उनसे जवाब दाखिल करने को कहा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि उच्च न्यायालय को पूर्व में दिये गये आश्वासन के बावजूद अधिकारी यात्रियों की सुरक्षा के लिए मार्शल तैनात नहीं कर रहे हैं।

आरोप यह भी है कि मार्शल के वेतन जारी नहीं किये जा रहे और इससे संकेत मिलता है कि अधिकारी ‘बस मार्शल योजना’ को जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘यह बहुत हैरान करने वाली बात है क्योंकि डीटीसी में यात्रियों, विशेष रूप से महिला, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’

याचिका में कहा गया कि परिवहन विभाग ने 2015 में बसों में महिलाओं की सुरक्षा में सुधार के लिए ‘बस मार्शल योजना’ शुरू की थी। साल 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद यह योजना लागू की गयी थी और 2019 में इसके तहत 13,000 बस मार्शल तैनात करने का फैसला किया गया।

इसमें कहा गया कि दिल्ली सरकार ने दिसंबर 2022 में डीटीसी बसों में मार्शल तैनात करने पर उच्च न्यायालय में विस्तृत बयान दिया था।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि खबरों के अनुसार वित्त विभाग अब योजना को जारी रखने के पक्ष में नहीं लगता और मार्शल का वेतन रोका जा रहा है।

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