नयी दिल्ली, 16 जुलाई केंद्र की उच्च स्तरीय परीक्षा सुधार समिति को हितधारकों से हजारों सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनमें परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी गड़बड़ी या चूक के लिए नियम बनाना, अंकों का सामान्यीकरण नहीं करना, परीक्षा केंद्रों पर बुनियादी ढांचे की जांच और कार्यक्रम में बदलाव के मामले में अभ्यर्थियों को उपयुक्त सूचना देना आदि शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, इनमें से कई सुझाव छात्रों की ओर से आए हैं।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘कुछ अभ्यर्थियों ने किसी भी चूक के मामले में स्पष्ट नियम बनाने का सुझाव दिया है। कृपांक के मुद्दे की तरह, अभ्यर्थी यह जानना चाहते हैं कि किन परिस्थितियों में क्या विकल्प होंगे और किस फॉर्मूले का उपयोग किया जाएगा। कुछ परीक्षा केंद्रों के बहुत दूर होने और वहां जरूरी बुनियादी ढांचे के अभाव की भी शिकायतें की गई हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सामान्यीकरण प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई गई है। कुछ अभ्यर्थियों ने इसके खिलाफ सुझाव दिया है, कुछ ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है ताकि अंक न तो अधिक बढ़ाए जाएं और न ही बहुत कम किए जाएं।’’
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख आर राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति ने 27 जून से 7 जुलाई के बीच ‘मायजीओवी’ प्लेटफॉर्म के माध्यम से हितधारकों, विशेष रूप से छात्रों और अभिभावकों से सुझाव, विचार और राय मांगी थी।
पैनल को छात्रों, अभिभावकों, कोचिंग संस्थानों, स्कूल शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और यहां तक कि करियर परामर्शदाताओं से 37,000 से अधिक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। इसे दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) और पीएचडी प्रवेश परीक्षा ‘नेट’ में कथित अनियमितताओं को लेकर आलोचनाओं के बीच, केंद्र सरकार ने पिछले महीने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के माध्यम से परीक्षाओं का पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए समिति का गठन किया था।
दो अन्य परीक्षा – सीएसआईआर-यूजीसी नेट और नीट पीजी – को एहतियात के तौर पर अंतिम समय में रद्द कर दिया गया था।
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