भोपाल, 29 मई केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि चीता परियोजना के अंतर्गत चीता संरक्षण एवं प्रबंधन में संलग्न अधिकारी और कर्मचारियों को नामीबिया/दक्षिण अफ्रीका अध्ययन प्रवास के लिए चयनित कर भेजा जाएगा।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि चीतों की सुरक्षा, संरक्षण, संवर्धन और प्रस्तावित चीता प्रोटेक्शन फोर्स के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय संसाधन सहित हर संभव सहयोग दिया जाएगा।
यादव ने यहां मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश के वन मंत्री विजय शाह और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक में चर्चा करते हुए यह बात कही।
केन्द्रीय मंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के लिए अतिरिक्त वन रक्षक और वनपाल की व्यवस्था का आग्रह करते हुए कहा कि अधोसंरचना और मानव संसाधन दोनों आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना से संबंधित भ्रामक सूचनाएं प्राय: सामने आती हैं, ऐसे में आमजन को भी प्रामाणिक जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में सात चीते खुले वन क्षेत्र और 10 चीते अनुकूलन बाड़ों में रह रहे हैं।
यादव ने कहा कि आगामी नवम्बर तक चीतों के लिए वैकल्पिक रहवास के तौर पर प्रदेश स्थित गांधी सागर अभयारण्य को भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कूनो में भी अनुमानित क्षमता के मुकाबले अभी चीते कम हैं। चीतों की देखभाल करने वाला स्टॉफ भी परिश्रमी है। परियोजना निश्चित ही सफल होगी।’’
यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार गंभीरता से परियोजना के क्रियान्वयन के लिए कार्य कर रही है। परियोजना में विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएं निरंतर मिल ही रही हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वे आगामी छह जून को कूनो राष्ट्रीय उद्यान जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।
वहीं, मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश को ‘चीता स्टेट’ के तौर पर पहचान बनाने के लिए बड़ी सौगात दी है।उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की पहले ही बाघ, तेंदुआ और घड़ियाल के लिए पहचान थी और अब ‘चीता राज्य’ के तौर पर पहचान बन गई है जो प्रतिष्ठा की बात है।
चौहान ने कहा कि हाल ही में तीन चीता शावकों की असमय मृत्यु पर मैं काफी चिंतित था। चीतों की समुचित देखभाल के लिए सरकार पूरे प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि पूरे विश्व में चीता शावकों के अस्तित्व का ‘सर्वाइवल रेट’ कम है, लेकिन हमारे प्रयासों में कमी नहीं रहेगी।
चौहान ने कहा कि राज्य सरकार चीता परियोजना की सफलता के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि चीता परियोजना से जुड़ा सम्पूर्ण अमला, जज्बे के साथ कार्य कर रहा है, परियोजना की प्रगति संतोषजनक है।
उन्होंने निर्देश दिए कि चीतों के लिए वैकल्पिक रहवास के लिए गांधी सागर अभयारण्य में आवश्यक व्यवस्थाएं युद्ध स्तर पर पूर्ण करवाएं।
बैठक में परियोजना से पर्यटन विकास की गतिविधियों पर भी चर्चा हुई।
प्रदेश के वन मंत्री शाह ने चीतों की निगरानी में तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा की दृष्टि से आधुनिक वाहन भी उपलब्ध करवाने का सुझाव दिया।
इस बैठक में केन्द्रीय वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सी.पी. गोयल, मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव वन जे एन कांसोटिया, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. एस पी यादव, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति शिव शेखर शुक्ला, प्रधान मुख्य वन संरक्षण वन्यप्राणी जे एस चौहान एवं अपर सचिव वन विभाग अशोक कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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