देश की खबरें | शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से नये तरीके से सोचने, अवकाश में भी सुनवाई के लिए कहा

नयी दिल्ली, 25 जुलाई सजायाफ्ता कैदियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई में देरी और उनकी अपील लंबित होने पर नाराजगी जताते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खिंचाई की। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय से लीक से हटकर सोचने और याचिकाओं का त्वरित निपटारा सुनिश्चित करने के लिए अवकाश के दिनों में भी सुनवाई के लिए कहा।

उच्चतम न्यायालय की खंडपीठ ने नाखुशी जताते हुए कहा कि यदि उच्च न्यायालय को मामले को संभालने में ‘मुश्किल’ आ रही है, तो वह ’अतिरिक्त बोझ उठाने’ और शीर्ष अदालत में याचिकाओं को मंगाने के लिए तैयार है।

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने कहा कि 853 आपराधिक अपील लंबित हैं, जहां याचिकाकर्ताओं ने 10 साल से अधिक समय जेल में बिताया है।

पीठ ने कहा, ‘‘अगर आपको यह इतना मुश्किल लग रहा है, तो हम अतिरिक्त बोझ उठाएंगे और जमानत याचिकाओं को मंगा लेंगे। आप को लीक से हटकर नये तरीके से सोचना होगा जैसे कि रविवार और शनिवार को अवकाश के दिन बैठना। हम व्यक्ति की स्वतंत्रता के मामले में सुनवाई कर रहे हैं। हमने यह कई बार आप से कहा है।’’

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया कि उसके समक्ष 853 मामलों की उनके क्रम संख्या के साथ एक सूची दाखिल की जाए, जिसमें व्यक्तियों द्वारा हिरासत में बिताये गये समय का ब्योरा हो। यह भी बताने के लिए कहा गया कि इनमें से किन मामलों में राज्य जमानत का विरोध कर रहा है और इसका आधार क्या है। शीर्ष अदालत ने ब्योरा देने के लिए राज्य को दो सप्ताह का समय दिया।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिकारियों को एक साथ बैठकर कैदियों की अपील के लंबित रहने के दौरान जमानत आवेदनों की सुनवाई को विनियमित करने के लिए संयुक्त सुझाव देने का भी निर्देश दिया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)