विदेश की खबरें | द. अफ्रीका: रूसी विदेश मंत्री शीर्ष यूरोपीय राजनयिकों के साथ जी20 बैठक में शामिल होंगे
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के लिए अमेरिका और रूस के बीच ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता के दो दिन बाद लावरोव जी20 के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए जोहानिसबर्ग पहुंचे। उन वार्ताओं में अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों और यूक्रेन को दरकिनार कर दिया गया था, जो इसमें शामिल नहीं थे।

रुबियो ने दक्षिण अफ्रीका के साथ तनाव के बीच जी20 बैठक में भाग नहीं लेने का फैसला किया, क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने इसकी कुछ नीतियों की निंदा अमेरिका विरोधी के रूप में की है। अमेरिका का प्रतिनिधित्व दक्षिण अफ्रीका में कार्यवाहक राजदूत डाना ब्राउन करेंगी।

जी20 दुनिया की 19 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ से बना है। यहां बृहस्पतिवार को बैठक में भाग लेने वालों में यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख काजा कालास और चीनी विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

इस वर्ष जी20 की अध्यक्षता करने वाले दक्षिण अफ्रीका को उम्मीद है कि बैठक में विकासशील देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों जैसे कि ऋण पुनर्वित्तपोषण और जलवायु परिवर्तन पर प्रगति होगी, वहीं एजेंडे के अनुसार, शुरुआती सत्रों में से एक में वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति पर चर्चा होगी।

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपीय संघ ने यूक्रेन के लिए निरंतर समर्थन का वादा किया है और रूस की आक्रामकता की निंदा की है, वहीं ये किसी भी युद्धविराम वार्ता का हिस्सा भी बनना चाहते हैं।

दक्षिण अफ्रीका में जी20 बैठक यूरोपीय देशों को रूस-यूक्रेन युद्ध और किसी शांति प्रक्रिया पर एकजुट होकर आवाज उठाने का मौका देती है।

जी20 का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए एक आधार तैयार करने के लिए देशों को एक साथ लाना है। लेकिन अमेरिका, यूरोप, रूस और चीन के अलग-अलग हितों के कारण यह समूह अक्सर मुद्दों पर किसी भी सार्थक आम सहमति तक पहुंचने के लिए संघर्ष करता है।

रुबियो द्वारा इस सप्ताह की बैठक का बहिष्कार करने का निर्णय और नवंबर में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले मुख्य जी20 शिखर सम्मेलन में भी शामिल न होने के उनके संकल्प से जी20 की प्रभावशीलता और कम होने का खतरा है।

ट्रंप प्रशासन ने इस महीने दक्षिण अफ्रीका को एक शासकीय आदेश के जरिए दंडित किया, जिसके तहत देश को दी जाने वाली सभी अमेरिकी सहायता और मदद पर रोक लगा दी गई। अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के रुख को अमेरिका विरोधी रुख बताया।

इस आदेश में संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में चल रहे एक मामले में गाजा में नरसंहार के लिए इजराइल पर आरोप लगाने के दक्षिण अफ्रीका के फैसले की आलोचना की गई और इसे फलस्तीनी आतंकवादी समूह हमास के लिए परोक्ष समर्थन बताया गया।

ट्रंप प्रशासन ने ईरान और चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के साथ दक्षिण अफ्रीका के संबंधों का भी हवाला दिया।

रुबियो ने जी20 की अध्यक्षता के लिए दक्षिण अफ्रीका के विषय को अस्वीकार कर दिया है जो ‘एकजुटता, समानता और निरंतरता’ है।

रुबियो ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘दूसरे शब्दों में: डीईआई (विविधता, समानता और समावेश) और जलवायु परिवर्तन।’’

रुबियो ने कहा, ‘‘मेरा काम अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना है, न कि करदाताओं के पैसे बर्बाद करना या अमेरिकी विरोध को बढ़ावा देना।’’

दक्षिण अफ्रीका ने इस बात को अधिक महत्व नहीं दिया कि रुबियो की अनुपस्थिति उसकी जी20 अध्यक्षता को कमजोर कर रही है। दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने कहा है कि रुबियो का फैसला ‘‘दक्षिण अफ्रीका में जी20 की बैठक का पूर्ण बहिष्कार नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका इस सप्ताह जोहानिसबर्ग में ‘किसी न किसी रूप में’ प्रतिनिधित्व करेगा।

दक्षिण अफ्रीका इस वर्ष अपनी जी20 अध्यक्षता के तहत 130 से अधिक कार्य समूह बैठकों और 23 मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करेगा, जो पिछले साल दिसंबर में शुरू हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के कार्यकाल के बाद 2026 में अमेरिका द्वारा जी20 अध्यक्षता की जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)