अस्ताना, 13 अक्टूबर विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने बृहस्पतिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन और महामारियों की तरह आतंकवाद सभी को प्रभावित करता है और भारत कई दशकों से कुछ देशों के वित्तीय तथा राजनीतिक समर्थन के माध्यम से संचालित सीमापार आतंकवाद से विशेष रूप से प्रभावित रहा है।
कजाकिस्तान के अस्ताना में ‘एशिया में संवाद तथा विश्वास निर्माण के कदमों पर सम्मेलन’ (सीआईसीए) के छठे सत्र को संबोधित करते हुए लेखी ने कहा कि 28 और 29 अक्टूबर को मुंबई तथा नयी दिल्ली में होने वाली संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की विशेष आतंकवाद निरोधक बैठक में आतंकवाद के उद्देश्य से नयी तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल को धता बताने पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत इस समय यूएनएससी की आतंकवाद निरोधक समिति, 2022 का अध्यक्ष है और उसने आतंकवाद निरोधक कार्रवाई पर सीआईसीए के समन्वयक की भूमिका निभाने के साथ कार्यशाला का भी प्रस्ताव रखा है।
लेखी ने कहा कि इस दिशा में भारत का गृह मंत्रालय नवंबर में ‘आतंकवाद के लिए कोई धन नहीं’ विषय पर एक सम्मेलन भी आयोजित करेगा।
उन्होंने सीआईसीए की बैठक में कहा, ‘‘आतंकवाद हमारी शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौती तथा खतरा बना हुआ है और सभी स्वरूपों में मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन करने वाला है। जलवायु परिवर्तन और महामारियों की तरह आतंकवाद हम सभी को प्रभावित करता है।’’
लेखी ने कहा कि आतंकवाद को लेकर भारत का रवैया कतई बर्दाश्त नहीं करने वाला है और वह स्पष्ट रूप से इसके सभी स्वरूपों की निंदा करता है जिसमें सीमापार आतंकवाद भी शामिल है।
उन्होंने कहा कि यूएनएससी में आतंकवाद निरोधक कार्रवाई ध्यान देने योग्य प्रमुख विषय है। इसमें भारत इस साल अस्थायी सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करेगा।
लेखी ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि सीआईसीए के सदस्य संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद निरोधक रणनीति (यूएनजीसीटीएस) के साथ सहयोग को बढ़ाने में कामयाब होंगे जिसे आज अंगीकार किया जाना है।’’
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक समिति (सीटीसी) की बैठक न्यूयॉर्क के बाहर अक्सर नहीं होती लेकिन भारत में यह सातवीं बार होगी।
मुंबई में सीटीसी की बैठक 26-11 के भयावह आतंकी हमले में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि होगी। समिति की अध्यक्ष राजदूत रुचिरा कंबोज ने यह बात कही थी।
लेखी ने कहा कि पिछले कुछ दशक में एशिया का उदय देखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘एशिया में हमारे सामने शांति और सुरक्षा के लिए विविध प्रकार की चुनौतियां हैं जो आर्थिक वृद्धि, खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा, संपर्क में कमी, अंतरक्षेत्रीय व्यापार में गिरावट और विशेष रूप से पर्यावरण से संबंधित विषयों से जुड़ी हैं।’’
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