नयी दिल्ली, 25 जुलाई संसद की एक समिति ने पाकिस्तान के साथ संबंधों में आतंकवाद को एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बताया और सुझाव दिया कि ‘पड़ोस प्रथम’ नीति के तहत आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक साझा मंच स्थापित करने के प्रयास किए जाएं।
संसद के दोनों सदनों में पेश ‘‘भारत की पड़ोस प्रथम नीति’’ विषय पर विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली इस समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार समिति का मानना है कि पड़ोस के अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों के विपरीत पाकिस्तान और चीन के साथ द्विपक्षीय संबंध विवादास्पद मुद्दों से ग्रस्त रहे हैं। इसमें कहा गया कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में मुख्य चिंताओं में से एक उसके नियंत्रण वाले इलाकों से उत्पन्न आतंकवाद है।
मंत्रालय ने समिति को बताया है कि किसी भी सार्थक वार्ता के लिए अनुकूल माहौल सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है।
समिति को यह भी बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सक्रिय सम्पर्क के परिणामस्वरूप भारत ने क्षेत्र की चिंताजनक स्थिति प्रस्तुत करके पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की कोशिशों और द्विपक्षीय मुद्दों के अंतरराष्ट्रीयकरण के प्रयासों को विफल कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के विरोधी रवैए को देखते हुए समिति चाहती है कि सरकार को क्षेत्रीय और बहुपक्षीय निकायों/संगठनों के साथ व्यापक रूप से सक्रियता से जुड़ना चाहिए ताकि उन्हें आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई भूमिका के बारे में संवेदनशील बनाया जा सके और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में उनका समर्थन हासिल किया जा सके।
समिति ने कहा कि ‘पड़ोस प्रथम’ नीति के तहत आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक साझा मंच स्थापित करने के प्रयास किए जाएं।
रिपोर्ट के अनुसार समिति पाती है कि ‘पड़ोस प्रथम’ नीति को ध्यान में रखते हुए भारत सभी पड़ोसी देशों के साथ आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त सामान्य पड़ोसी के संबंध बनाना चाहता है।
इसमें कहा गया है, हालांकि, तीन दशक से अधिक समय से भारत अपने निकटतम पड़ोसी से खतरों और निरंतर तनाव, अस्थिरता और आतंकवाद तथा आतंकवादी हमलों की बढ़ती आशंका का सामना कर रहा है।
इसमें कहा गया है कि समिति सीमा पार आतंकवाद से उत्पन्न होने वाले खतरों को ऐहतियाती तरीके से समाप्त करने के लिए सरकार के बदले हुए दृष्टिकोण का पूरी तरह से समर्थन करती है और साथ ही उसका यह रुख है कि हमारे पड़ोसी देशों के साथ द्विपक्षीय संबंध केवल आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में ही रह सकते हैं।
समिति चाहती है कि भारत इस क्षेत्र के सदस्य देशों के बीच अधिक घनिष्ठ सहयोग की दिशा में काम करे ताकि ऐसा वातावरण तैयार किया जा सके जहां सभी पड़ोसी देश ऐसी गतिविधियों में शामिल देशों के विरुद्ध एक स्वर में आवाज उठाएं और आतंकवाद के खतरों का मुकाबला करने के लिए सक्रिय कदम उठाएं।
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