विदेश की खबरें | आँसू, समझौता, तलाक - ब्रेक्सिट के कारण यूके छोड़ने में मिला यही सब
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

बर्मिंघम, 19 सितंबर (द कन्वरसेशन) निकोल और हेम्मो के दो बच्चे हैं। नीदरलैंड जाने से कुछ दिन पहले ही हमारी टीम ने उनसे उनके घर पर मुलाकात की। घर के हर कमरे में बक्सों के ढेर भरे हुए हैं, जो आने वाले दिनों में भेजे जाने के लिए तैयार थे।

हालाँकि वे कई वर्षों से ब्रिटेन में रह रहे थे, लेकिन ब्रेक्सिट ने उन्हें यह सोचने करने के लिए मजबूर किया कि उनके परिवार का भविष्य कहाँ है।

निकोल, जो जर्मन हैं, ने हमें बताया:

छोड़कर जाना जैसे एक अंतिम संस्कार जैसा लगता है, क्योंकि एहसास नहीं होता कि क्या होने वाला है और जब एहसास होता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है, क्योंकि आप चीजों को पहले से करने, उसकी तैयारी में इतने व्यस्त होते हैं कि ऐसा कुछ होने के, कई हफ़्तों के बाद ही आपको एहसास होता है कि आपने क्या खोया है, आप क्या खो रहे हैं।

पूरा परिवार यूके छोड़ने के लिए सहमत हो गया था, लेकिन गंतव्य चुनना अधिक श्रमसाध्य साबित हुआ, केवल इसलिए नहीं कि ‘‘घर वापस जाना’’ कोई विकल्प नहीं था - कम से कम एक ही समय में सभी के लिए नहीं। निकोल मूल रूप से जर्मनी की हैं, उनके पति हेम्मो डच हैं और उनके बच्चे ब्रिटेन में पैदा हुए हैं।

अपने दिन की शुरुआत साक्ष्य-आधारित समाचारों से करें।

यूके में हजारों लोगों की तरह, निकोल के परिवार ने यूरोपीय संघ की पैन-यूरोपीय नागरिकता की आकांक्षा को मूर्त रूप दिया, कई देशों में घूमकर और दूसरे देशों में एक साथ बसकर।

इन परिवारों को यह स्वीकार करना होगा कि यूरोपीय संघ छोड़ने के ब्रिटेन के 2016 के फैसले का उनके और उनके भविष्य के लिए क्या मतलब है।

लेकिन छोड़ना शायद ही कभी सीधा रहा होगा। हाल ही में द सोशियोलॉजिकल रिव्यू में प्रकाशित हमारे शोध से पता चलता है कि बाहर निकलने के रास्ते रैखिक से बहुत दूर हैं। उन्हें अक्सर परिवार इकाई के विन्यास के आधार पर कई समायोजन की आवश्यकता होती है।

हमारा अध्ययन आशाओं, चुनौतियों, बलिदानों और उलझनों के जटिल जाल को उजागर करने वाली इन अनकही कहानियों की गहराई से पड़ताल करता है।

अलग-अलग रुचियों, जरूरतों और अपेक्षाओं का सामना करते हुए, जो परिवार अंततः ब्रेक्सिट के कारण यूके से दूर चले गए, उन्होंने अपने मतभेदों को समायोजित करने की दो मुख्य रणनीतियाँ अपनाईं। कुछ लोगों ने स्थानिक रूप से समझौता करने, बातचीत करने और एक ऐसा गंतव्य चुनने की कोशिश की जो परिवार के अधिकांश सदस्यों के लिए उपयुक्त हो।

समान राष्ट्रीयता वाले परिवारों के लिए ‘‘घर जाना’’ मुख्य विकल्प था, हालाँकि उनके लिए भी, कई चुनौतियों से पार पाना था। यह विशेष रूप से उन बच्चों के मामले में था जो ब्रिटेन में पैदा हुए थे और अपने माता-पिता के मूल देश में कभी नहीं रहे थे और देश की में पारंगत नहीं थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)