Petrol, Diesel Price Hike: वैश्विक कच्चे तेल के बाजार (Global Crude Oil Markets) में जारी उतार-चढ़ाव और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों (International Energy Prices) के दबाव में भारत में शुक्रवार से ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि की गई है. सरकारी तेल विपणन कंपनियों (Government-Owned Oil Marketing Companies) (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल (Petrol and Diesel) की खुदरा दरों में ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है. संशोधित कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, जिससे देश के सभी प्रमुख महानगरों में परिवहन और दैनिक जीवन की लागत बढ़ने की आशंका है. यह भी पढ़ें: Petrol and Diesel Prices: भारत में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच दी चेतावनी
महानगरों में नई कीमतें: कोलकाता में सबसे तेज बढ़त
देश के चार प्रमुख महानगरों में से कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक ₹3.29 प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई है. वहीं, मुंबई और दिल्ली में भी कीमतों में बड़ा बदलाव आया है.
प्रमुख शहरों में आज की कीमतें (INR/लीटर):
| शहर | पेट्रोल की कीमत | डीजल की कीमत |
| दिल्ली | 97.77 | 90.67 |
| मुंबई | 106.68 | 93.14 |
| कोलकाता | 108.74 | 95.13 |
| चेन्नई | 103.67 | 95.25 |
| बेंगलुरु | 102.92 | 89.02 |
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी
Hike in fuel prices; Petrol prices rise from Rs 94.77 to Rs 97.77 per litre, while diesel prices increase from Rs 87.67 to Rs 90.67 per litre pic.twitter.com/sLk3rf6E42
— ANI (@ANI) May 15, 2026
ईंधन मुद्रास्फीति की रफ्तार हुई तेज
अप्रैल महीने के महंगाई के आंकड़ों ने पहले ही चिंता बढ़ा दी थी. थोक ईंधन मुद्रास्फीति में भारी उछाल देखा गया है. पेट्रोल मुद्रास्फीति पिछले महीने के 2.50% से बढ़कर 32.4% पर पहुंच गई, जबकि हाई-स्पीड डीजल में यह 3.62% से बढ़कर 25.19% हो गई. कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने परिवहन और ईंधन पर निर्भर क्षेत्रों पर लागत का बोझ बढ़ा दिया है.
तेल कंपनियों पर बढ़ता वित्तीय बोझ
ब्लूमबर्ग न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले खुदरा दरों में धीमी बढ़ोतरी के कारण इन कंपनियों को ईंधन बिक्री पर प्रतिदिन लगभग ₹10 बिलियन का नुकसान होने का अनुमान है. कंपनियों ने अब तक कम लागत वाले पुराने स्टॉक के कारण बोझ कम रखा था, लेकिन भंडार समाप्त होने के बाद कीमतों में वृद्धि अनिवार्य हो गई थी.
वैश्विक आपूर्ति और रणनीतिक चिंताएं
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता के रूप में भारत अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर तनाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता ने माल ढुलाई और रसद लागत को बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति में व्यवधान जारी रहता है, तो आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है.













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