देश की खबरें | कृषि विधेयकों का विरोध करने को लेकर ओडिशा में बीजद विपक्षी दलों के निशाने पर
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

भुवनेश्वर, 21 सितंबर पूर्व में कई मौकों पर संसद में नरेंद्र मोदी सरकार के रुख का समर्थन करने वाले बीजू जनता दल(बीजद) ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है , जिसे लेकर राज्य के राजनीतिक गलियारों में उसे तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य में विपक्षी भाजपा के नेताओं ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक नीत पार्टी (बीजद) को विनयमित बाजार समतियों पर अपना नियंत्रण समाप्त होने की आशंका है।

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हालांकि, सत्तारूढ़ बीजद नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी भी विशेष राजनीतिक विचारधारा से दिशानिर्दशित नहीं है। साथ ही, पार्टी यह चाहती है कि छोटे और सीमांत किसानों तथा बटाईदारों के प्रभावी संरक्षण के लिए विधेयक में कुछ कमियों को दूर करने की खातिर इसकी और अधिक जांच पड़ताल की जाए।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा से राज्यसभा के कुल 10 सदस्यों में बीजद के नौ, जबकि भाजपा के एक सदस्य हैं।

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कृषि विधेयकों को रविवार को राज्यसभा में पारित किया गया। लोकसभा इन्हें पहले ही पारित कर चुकी है।

राज्यसभा में रविवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 रविवार को ध्वनि मत से पारित किया गया था।

बीजद ने कृषि विधेयकों का विरोध किया है, हालांकि कुछ ही दिन पहले उसने राज्यसभा के उप सभापति पद के चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार हरिवंश का समर्थन किया था।

बीजद ने पिछले कुछ वर्षों में भाजपा नीत केंद्र सरकार का कई मौकों पर समर्थन किया है। उसने पिछले साल संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और तीन तलाक विधेयक का समर्थन किया था। इससे पहले, बीजद ने मोदी सरकार के नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को लेकर उठाये गये कदम का भी समर्थन किया था। बीजद ने पिछले साल राज्यसभा चुनाव में में भाजपा के उम्मीदवार अश्विनी वैष्णव का भी समर्थन किया था।

कृषि विधेयकों का विरोध करने को लेकर बीजद पर निशाना साधते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सुरेश पुजारी ने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य मंडियों में धान खरीद के दौरान बिचौलिए और दलालों की भूमिका को समाप्त करना है।

उन्होंने कहा कि विधेयकों के पारित होने से अब किसानों को उनकी उपज का वास्तविक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिल सकेगा और उपज को वे नजदीकी मंडी में बेच सकते हैं।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष पुजारी ने आरोप लगाया कि बीजद विधेयकों का विरोध कर रही है क्योंकि राज्य में सभी विनियमित बाजार समितियों (आरएमसी) का नियंत्रण अबतक ओडिशा में सत्तारुढ़ दल द्वारा किया जा रहा है।

वहीं, बीजद के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में पार्टी मुख्य सचेतक सस्मित पात्रा ने कहा कि पार्टी ने लगातार विधेयकों में कुछ कमियों को लेकर अपनी चिंताएं प्रकट की हैं और विरोध इसलिए हो रहा है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

बीजद के एक अन्य वरिष्ठ सांसद प्रसन्न आचार्या ने कहा कि पार्टी किसानों के हितों का संरक्षण करना चाहती है लेकिन कृषि विधेयक में कुछ अस्पष्टता है। इसलिए बीजद ने विधेयकों को पड़ताल के लिये प्रवर समिति के पास भेजे जाने पर जोर दिया।

पुजारी ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के चिट फंड घोटाले में बीजद के कुछ नेताओं के परिसरों में कुछ ही दिन पहले सीबीआई के छापे मारे जाने को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ दल ने सभवत: यह रुख अपनाया।

हालांकि, आचार्य ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी ने कभी सीबीआई जांच का विरोध नहीं किया।

बीजद के कृषि विधेयकों का विरोध करने को नाटक बताते हुए ओडिशा प्रदेश कांग्रेस समिति (ओपीसीसी) के अध्यक्ष निरंजन पटनायक ने कहा कि राज्य के लोग यह अच्छी तरह से जानते हैं कि बीजद और भाजपा दोनों एक साथ हैं।

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