ताजा खबरें | तमिलनाडु जनजाति लीड विधेयक दो रास

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जनजातियों के कल्याण और विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह बात आदिवासी समुदाय की एक महिला के देश की राष्ट्रपति बनने से साबित हो जाती है।

कृष्णैया ने कहा कि वह इस समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खास तौर पर आकृष्ट करना चाहते हैं क्योंकि यह लोग जिन स्थानों पर रहते हैं वहां अस्पताल तो दूर की बात है, स्वास्थ्य केंद्र भी बमुश्किल ही हैं।

टीआरएस सदस्य बी लिंगैया यादव ने कहा कि तेलंगाना की भी कुछ जातियों ने स्वयं को अनुसूचचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग की है और सरकार को उनकी मांग पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इस बात पर खास ध्यान देना चाहिए कि अनुसूचित जनजातियों में शामिल किए जाने के बाद इन समुदायों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले ताकि वे अपने समुदाय के विकास में योगदान दे सकें।

तृणमूल कांग्रेस की मौसम नूर ने कहा कि तमिलनाडु की नारिकुर्वर और कुरूविकरण पहाड़ी जनजातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने के लिए यह विधेयक लाया गया है जिनकी राज्य में आबादी 0.1 फीसदी से भी कम है। उन्होंने कहा कि लोकुर समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति समुदाय में शामिल करने की मांग कर रहा है लेकिन उसकी मांग एक दशक से भी अधिक समय से लंबित है।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति समुदाय के लोगों पर अत्याचार के मामले भी बढ़े हैं और ऐसे कई मामले अदालतों में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि जनजातियों को केवल अनुसूचित जनजाति की सूची में लाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि उनके कल्याण के लिए नीति बनानी होगी।

द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा ने कहा कि यह विधेयक उनके राज्य से जुड़ा है अत: उनके राज्य के सदस्यों को इस पर बोलने के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अन्य जातियों की स्थिति को देखते हुए उन्हें भी अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल आरक्षण व्यवस्था ही ऐसे लोगों के विकास के लिए मददगार रही है लेकिन अन्य कदम भी उठाने जरूरी हैं।

जद(एस) के नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा ने कहा कि कर्नाटक में भी लंबे समय से कुरुवर समुदाय की जनजातियां अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने की मांग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जनजातियों ने इस मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का रुख किया जिसने कहा कि यह दायित्व संसद का है।

उन्होंने कहा कि कर्नाटक की सरकारों ने इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भी भेजे लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब वह प्रधानमंत्री थे तब कुछ समुदायों की यह मांग पूरी कर सकते थे लेकिन उनसे चूक हो गई।

देवेगौड़ा ने कहा कि अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल न किए जाने पर ऐसे कई समुदाय सरकार की ओर से दिए जा रहे लाभों से वंचित रह जाते हैं और इससे उनका विकास बाधित होता है।

आम आदमी पार्टी के संत बलबीर सिंह ने कहा कि जात-पांत को लेकर होने वाला भेदभाव आज तक दूर नहीं हो पाया जो बेहद दुख की बात है।

जारी मनीषा अविनाश

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