मदुरै (तमिलनाडु), 26 अगस्त तमिलनाडु के मदुरै रेलवे स्टेशन पर खड़े रेलयात्री कोच में शनिवार तड़के आग लग गई जिसमें रामेश्वरम जाने वाले कम से कम नौ तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। दक्षिण रेलवे ने यह जानकारी दी।
दक्षिण रेलवे ने कहा कि यात्री कोच में ‘अवैध रूप’ से लाए गए गैस सिलेंडर की वजह से आग लगी।
जिस डिब्बे में आग लगी, वह एक ‘प्राइवेट पार्टी कोच’ (किसी व्यक्ति द्वारा बुक किया गया पूरा डिब्बा) था। इसमें सवार यात्री पिछले सप्ताह लखनऊ से तीर्थयात्रा पर निकले थे और अधिकतर यात्री उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के इलाकों के निवासी थे।
हादसे के पीड़ितों में से एक ने बताया कि डिब्बे का दरवाजा बंद था और उसे तोड़ने के बाद लोग सुरक्षित स्थान पर पहुंचे और एक बड़ा हादसा टला।
घटनास्थल पर जांच के लिए पहुंची मदुरै की जिलाधिकारी एमएस संगीता ने कहा कि रेलकोच में लगी आग में नौ लोगों की मौत हुई है जबकि 20 अन्य घायल हुए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने मौतों पर शोक व्यक्त किया और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर दुख प्रकट किया और मौतों पर शोक जताया। तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश सरकार और रेलवे ने पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
हालांकि दक्षिणी रेलवे ने शुरुआत में मौतों की संख्या 10 बताई थी और बाद में इस आंकड़ों को संशोधित कर 9 किया।
दक्षिण रेलवे की विज्ञप्ति में बताया गया है कि आग लगने की घटना शनिवार तड़के पांच बजकर 15 मिनट पर हुई और मौके पर पहुंचे दमकलकर्मियों ने सुबह सात बजकर 15 मिनट पर आग पर काबू पा लिया।
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘यह एक प्राइवेट पार्टी कोच था, जिसे कल (25 अगस्त को) नागरकोविल जंक्शन पर ट्रेन संख्या 16730 (पुनालुर-मदुरै एक्सप्रेस) में जोड़ा गया था। डिब्बे को अलग कर मदुरै रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया गया था। इस डिब्बे में यात्री अवैध रूप से गैस सिलेंडर लेकर आए थे और यह आग लगने का कारण बना।’’
इसमें बताया कि डिब्बे में सवार तीर्थयात्रियों ने 17 अगस्त को लखनऊ से यात्रा शुरू की थी। उनका कल (27 अगस्त को) चेन्नई जाने का कार्यक्रम था... चेन्नई से वे लखनऊ लौटने वाले थे।’’
विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘‘जब डिब्बा खड़ा था, तब कुछ यात्री चाय/नाश्ता बनाने के लिए अवैध रूप से लाए गए रसोई गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसके कारण डिब्बे में लग गई। इसकी भनक लगने पर अधिकांश यात्री बाहर निकल गए। कुछ यात्री डिब्बे को अलग किए जाने से पहले ही प्लेटफार्म पर उतर गए थे।’’
इसमें कहा गया कि यात्रियों द्वारा अवैध रूप से गैस सिलेंडर, स्टोव और अन्य ज्वलनशील सामान लाया गया था, जिसके कारण आग लगने की घटना हुई।
घटनास्थल पर एक एलपीजी सिलेंडर, आलू की बोरी, बर्तन और लकड़ियां मिली हैं जिससे डिब्बे में खाना पकाए जाने के पर्याप्त संकेत मिले हैं।
यहां एक सरकारी अस्पताल में इलाज करा रही घायल अलका प्रजापति ने बताया कि घटना के समय डिब्बे में यात्री सो रहे थे ‘आग, आग’ का शोर सुनकर उनकी आंख खुली।
उन्होंने पीटीआई- से कहा, ‘‘हम सो रहे थे तभी चीखने की आवाजें सुनाई दी। इसके बाद भागने की कोशिश की, लेकिन डिब्बे का दरवाजा बंद था इसलिए बाहर निकलने में परेशानी हुई। किसी ने दरवाजा तोड़ा जिसके बाद हम बाहर आ पाए। अंदर घना धुआं भर गया था और मैं ठीक से सांस नहीं ले पा रही थी और बस भगवान को याद किया।’’
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