देश की खबरें | तमिलनाडु परिसीमन बैठक चुनावों के मद्देनजर, द्रमुक के पास बताने के लिए कुछ नहीं : सीतारमण

चेन्नई, 22 मार्च केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आरोप लगाया कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) कथित रूप से हिंदी थोपने और लोकसभा सीटों के परिसीमन जैसे ‘भावनात्मक’ मुद्दों को इसलिए उठा रही है क्योंकि उसके पास तमिलनाडु में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान लोगों के सामने अपनी उपलब्धियों के तौर पर दिखाने के लिए कुछ नहीं है।

सीतारमण ने तमिलनाडु की कानून व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि वहां ‘अराजकता’ फैली हुई है। उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय की छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर निशाना साधा।

सीतारमण ने कहा, “उस छात्रा का क्या हुआ। आरोपी आपकी पार्टी का कार्यकर्ता है या नहीं?”

उन्होंने 2024 में हुई शराब से मौतों के बारे में पूछा, “अब तक कल्लाकुरिची घटना पर सरकार का क्या जवाब है? ”

सीतारमण ने स्टालिन से पूछा कि द्रमुक सरकार ने अपने प्रयासों से क्या ‘विशिष्टता’ हासिल की है?

उन्होंने आश्चर्य जताया कि क्या वह (स्टालिन) तमिलनाडु में किसी कल्याणकारी योजना का उल्लेख कर सकते हैं।

वित्त मंत्री ने कहा, “कुछ भी नहीं।”

उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “इसलिए अपनी अक्षमता, भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए ये पुराने भावनात्मक मुद्दे उठाएं जा रहे हैं। ठीक वैसे ही जैसे मनमोहन सिंह (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार के दौरान रोजाना घोटाले सामने आते थे, जिसमें द्रमुक भी शामिल थी। तमिलनाडु की मौजूदा सरकार में भी ऐसे ही घटनाएं हो रही हैं।”

सीतारमण ने द्रमुक पर निशाना साधते हुए कहा, “इसलिए 2026 के चुनावों (विधानसभा) का सामना कैसे किया जाए तो परिसीमन का मुद्दा उठाया गया।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष ही स्पष्ट कर दिया था कि परिसीमन के मामले में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा।

सीतारमण ने दावा किया, “हमें स्थिति को समझना होगा। उनके (द्रमुक) पास 2026 (चुनाव में) में जनता को दिखाने के लिए कुछ भी नहीं है, इसलिए वे भावनात्मक रूप से तमिलनाडु को 1960 और 1980 के दशक में वापस ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।”

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