देश की खबरें | ‘अन्न भाग्य’ योजना को लागू करने के लिए चावल उत्पादक राज्यों से चल रही बात : सिद्धरमैया

बेंगलुरु, 17 जून कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने शनिवार के कहा कि उनकी सरकार द्वारा घोषित ‘अन्न भाग्य’ योजना के वास्ते आवश्यक चावल खरीदने के लिए चावल उत्पादक राज्यों से बातचीत चल रही है और जल्द योजना लागू करने को लेकर फैसला किया जाएगा।

इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को प्रति व्यक्ति हर महीने पांच किलोग्राम अतिरिक्त चावल देने का प्रस्ताव है।

सिद्धरमैया ने कहा कि तेलंगाना ने चावल की आपूर्ति करने में असमर्थता जताई है जबकि छत्तीसगढ़ 1.50 लाख मीट्रिक टन चावल मुहैया कराने को लेकर तैयार है परंतु उसके द्वारा तय कीमत थोड़ी अधिक है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पड़ोसी आंध्र प्रदेश से भी बात कर रही है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैंने परसो तेलंगाना के मुख्यमंत्री से बात की थी और कल उन्होंने स्थिति का पता लगाकर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में अतिरिक्त चावल नहीं है। मैंने मुख्य सचिव को आंध्र प्रदेश से बात करने के लिए कहा है। छत्तीसगढ़ 1.50 लाख मीट्रिक टन चावल देने को तैयार है लेकिन उसकी कीमत थोड़ी अधिक है और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च आएगा।’’

मुख्यमंत्री ने यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने मुद्दे पर चर्चा करने और आगे का फैसला लेने के लिए अधिकारियों की बैठक बुलाई है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के बेटे बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक में चावल उपलब्ध होने के बावजूद राज्य सरकार दूसरे राज्यों से संपर्क कर रही है ताकि कमीशन मिल सके। इस बारे में पूछे जाने पर सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘उनसे (विजयेंद्र) से पूछें कि अगर राज्य में चावल उपलब्ध है तो उसकी आपूर्ति कराएं। क्या उनकी मिल में चावल उपलब्ध है?’’

केंद्र सरकार द्वारा कथित तौर पर खुले बाजार बिक्री योजना (घरेलू) के तहत चावल और गेंहू की बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद चावल उत्पादक राज्यों से बात कर रही है क्योंकि कथित प्रतिबंध से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) राज्य को ‘अन्न भाग्य’ योजना के लिए अतिरिक्त चावल मुहैया नहीं करा रहा है।

केंद्र पर कर्नाटक से ‘सौतेला व्यवहार’ करने का आरोप लगाते हुए राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के.एच.मुनियप्पा ने शनिवार को कहा कि वे चावल की आपूर्ति को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

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