देश की खबरें | ताहिर हुसैन ने दंगों के मामले में प्राथमिकी रद्द कराने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया

नयी दिल्ली, 15 मई आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने फरवरी 2020 में यहां भड़की सांप्रदायिक हिंसा के दौरान दंगे के अपराध में अपने खिलाफ दर्ज एक प्राथमिकी को रद्द करने की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

हुसैन के वकील ने दलील दी कि वर्तमान मामले में सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है और उन्हीं कथित घटनाओं के संबंध में पहले से ही एक और प्राथमिकी दर्ज है।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने दिल्ली पुलिस के वकील की अनुपलब्धता के कारण मामले को 25 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि 2020 में दर्ज दोनों मामलों में अंतर है। यद्यपि वर्तमान प्राथमिकी दंगों के आरोपों से संबंधित है, अन्य प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) शामिल है।

हुसैन की ओर से पेश अधिवक्ता तारा नरूला ने दलील दी कि अन्य प्राथमिकी "व्यापक" है और वर्तमान प्राथमिकी को भी उसमें शामिल किया गया होता। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कोई "समयसीमा" नहीं है, जिसके अंदर किसी को प्राथमिकी रद्द कराने के लिए याचिका दायर करनी हो।

हुसैन 2020 के दंगों के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज विभिन्न मामलों में अभियोजन का सामना कर रहे हैं, जिसमें भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत हत्या के प्रयास और दंगा करने के कथित अपराध शामिल हैं।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)