नयी दिल्ली, 13 जुलाई दिल्ली की एक अदालत ने तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेकर वीजा नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के आरोपी किर्गिस्तान के 85 नागरिकों को सोमवार को जमानत दे दी।
इन लोगों के खिलाफ वीजा नियमों के उल्लंघन के अलावा अवैध रूप से धर्म प्रचार करने और कोविड-19 से संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।
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मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट गुरमोहिना कौर ने ने 10-10 हजार रुपये के निजी मुचलके पर इन लोगों को जमानत दी।
अदालत ने अब तक इस मामले में 34 देशों के 532 विदेशी नागरिकों को जमानत दी है।
पुलिस ने जून में इस मामले में 36 विभिन्न देशों के 956 विदेशी नागरिकों के खिलाफ 59 आरेाप पत्र दायर किये थे।
इन लोगों की ओर से पेश वकीलों आशिमा मंडला, मंदाकिनी सिंह और फहीम खान ने कहा कि जिन आरोपियों को सोमवार को जमानत मिली हैं, वे मंगलवार को समझौता आवेदन (प्ली बार्गेनिंग एप्लिकेशन) देंगे।
इस तरह के आवेदन के तहत आरोपी अपना दोष स्वीकार कर लेता है और कम दंड देने की याचना करता है।
दंड प्रक्रिया संहिता के तहत जिन मामलों में अधिकतम सजा सात वर्ष है, जो अपराध समाज की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित नहीं करते हों और जो अपराध महिला अथवा 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के खिलाफ न हों, उनमें समझौता आवदेन देने की इजाजत होती है।
वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान सभी विदेशी नागरिक अदालत के समक्ष पेश किये गये थे।
इससे पूर्व जांच अधिकारी ने अदालत को बताया था कि मामले में 956 विदेशियों के खिलाफ जांच पूरी हो गई है।
केंद्र ने आरोपियों के वीजा रद्द कर उन्हें काली सूची में डाल दिया है। हालांकि इन आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है और ये लोग दिल्ली उच्च न्यायालय की मंजूरी से विभिन्न इलाकों में रह रहे हैं।
राजधानी के निजामुद्दीन मरकज में मार्च में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में कम से कम 9,000 लोग शामिल हुए थे। इसके बाद इनमें से अनेक देश के दूसरे हिस्सों में भी गये थे।
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