नयी दिल्ली, एक अगस्त उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान में करीब 50,000 खदानों का आवंटन नीलामी के जरिये किए जाने की राह मंगलवार को अपने फैसले से आसान कर दी।
न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय के उस फैसले को निरस्त कर दिया जिसमें खदानों का आवंटन नीलामी के जरिये करने की नीति को नकार दिया गया था।
राजस्थान सरकार ने उच्च न्यायालय के इस फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील की थी।
पीठ ने अपने निर्णय में कहा, "जब सरकार नीलामी के तरीके से सभी पात्र व्यक्तियों को समान शर्तों पर शामिल होने का मौका देने का फैसला करती है तो कोई भी यह दावा नहीं कर सकता है कि वह लंबित आवेदन के आधार पर पट्टा पाने का हकदार है।"
राजस्थान सरकार आजादी के समय से ही खदानों का आवंटन 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति पर करती आ रही थी। लेकिन वर्ष 2013 में उसने खदानों का आवंटन नीलामी के आधार पर करने का फैसला किया था जिसे उच्च न्यायालय में निरस्त कर दिया गया था।
प्रेम
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