नयी दिल्ली, सात अक्टूबर भाजपा ने बुधवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय का शाहीन बाग पर फैसला उसके रुख को सही ठहराता है और कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) और वाम दलों के षड्यंत्र को उजागर करता है।
भाजपा ने दावा किया कि विपक्षी दलों ने लोगों को प्रदर्शन के लिए उकसाया, जो बाद में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दंगों के रूप में परिवर्तित हुआ।
शाहीन बाग में सौ दिन तक चले धरना प्रदर्शन से उत्पन्न स्थिति के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर अनिश्चितकाल के लिये कब्जा नहीं किया जा सकता और असहमति व्यक्त करने के लिये निर्धारित स्थानों पर ही प्रदर्शन होने चाहिये।
न्यायालय ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन के लिये सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा ‘स्वीकार्य नहीं’ है।
यह भी पढ़े | MP Bypolls 2020: मध्य प्रदेश विधानसभा उप चुनाव के लिए BSP ने जारी की 9 उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट.
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि विरोध करने का किसी का अधिकार उसे दूसरों के मार्ग अवरूद्ध करने की अवहेलना करने का अधिकार नहीं देता।
उन्होंने कहा, ‘‘यह न सिर्फ भाजपा के रुख को सही ठहराता है, बल्कि कांग्रेस, आप और वामपंथी दलों के षड्यंत्र को भी उजागर करता है, जिसने लोगों को शाहीन बाग के प्रदर्शन के लिए उकसाया जो बाद में दंगे के रुप में परिवर्तित हुआ और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 50 से अधिक लोगों की नृशंस हत्या का कारण बना।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि आप और वामपंथी दलों के कई नेता शाहीन बाग के प्रदर्शन स्थल पर गए और लोगों को गैरकानूनी प्रदर्शन के लिए उकसाया।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा कि लोकतंत्र और असहमति साथ-साथ चलते हैं और विरोध और असहमति व्यक्त करने का अधिकार संवैधानिक योजना से मिलता है लेकिन कतिपय कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी के साथ।
पीठ ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के दौरान असहमति व्यक्त करने के पुराने तरीकों को स्वशासित लोकतंत्र में असहमति के समकक्ष नहीं रखा जा सकता।
पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, किसी कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। हमें यह भी एकदम स्पष्ट करना होगा कि सार्वजनिक रास्तों और सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह, वह भी अनिश्चिकाल के लिये, कब्जा नहीं किया जा सकता।’’
न्यायालय ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान पिछले साल दिसंबर से शाहीन बाग की सड़क को आन्दोलनकारियों द्वारा अवरूद्ध किये जाने को लेकर दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न का शिकार अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने के उद्देश्य से नागरिकता कानून में संशोधन किया गया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY