देश की खबरें | उच्चतम न्यायालय में सामूहिक दुष्कर्म के दो आरोपियों को दी जमानत रद्द की

नयी दिल्ली, 24 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने 2021 में एक पुलिस कांस्टेबल की नाबालिग लड़की से कई बार दुष्कर्म करने के आरोप में एक स्थानीय विधायक के बेटे समेत दो आरोपियों को जमानत देने के राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि यह अपराध ‘‘जघन्य और स्त्री जाति की गरिमा पर हमला’’ था।

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने कहा, ‘‘अदालत को जमानत देते वक्त आरोपों की प्रकृति, सजा की गंभीरता, क्या आरोपों में दोषसिद्धि शामिल है और आरोपों के समर्थन में सबूत की प्रकृति जैसी बातों को ध्यान में रखना चाहिए।’’

पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों पर गौर करते वक्त उसने पाया कि उच्च न्यायालय मुख्य रूप से उन दलीलों से सहमत हो गया कि शिकायत दर्ज करने में 13 महीने की देरी हुई और उसने इस बात पर गौर नहीं किया कि एक आरोपी किसी विधायक का बेटा है और इसके परिणामस्वरूप पीड़िता के परिवार पर किसी तरह का दबाव होने की आशंका हो सकती है।

उच्चतम न्यायालय नाबालिग पीड़िता के एक रिश्तेदार की अपील पर सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोपियों को दी गयी जमानत रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

पुलिस ने बताया था कि घटना के वक्त पीड़िता की उम्र 15 साल और छह महीने थी तथा वह 10वीं कक्षा में पढ़ रही थी। उसकी एक आरोपी विवेक से जान पहचान थी जो कथित तौर पर उसे 24 फरवरी 2021 को राजस्थान के माहवा में एक होटल में ले गया था। उसने वहां अपने दोस्तों दीपक और नेतराम के साथ कथित तौर पर लड़की को नशा देने के बाद उससे दुष्कर्म किया तथा घटना की वीडियो बना ली थी।

उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)