(संजय गंजू)
चंडीगढ़, 30 अप्रैल ‘सेल्फी विद डॉटर’ पहल के पुरोधा सुनील जागलान ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने को लेकर करीब आठ साल पहले हरियाणा के एक छोटे-से गांव से शुरू हुआ यह अभियान धीरे-धीरे सफलता की कहानी बन गया।
जींद में बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच जागलान ने जून 2015 में अपने गांव से यह अभियान शुरू किया था।
उनकी इस पहल की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी तारीफ की थी तथा उन्होंने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी इसका जिक्र किया था।
रविवार को इस कार्यक्रम की 100वीं कड़ी में मोदी ने फिर से जागलान की पहल की तारीफ करते हुए कहा कि यह एक वैश्विक अभियान में बदल गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस अभियान का मकसद न तो सेल्फी है न प्रौद्योगिकी है, बल्कि बेटी को दी जाने वाली महत्ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अभियान इस बात पर भी रोशनी डालने के लिए है कि किसी व्यक्ति की जिंदगी में एक बेटी का कितना बड़ा स्थान होता है।...यह ऐसे कई प्रयासों का नतीजा है जिनके कारण आज हरियाणा में लिंग अनुपात में सुधार हुआ है।’’
‘मन की बात’ की पिछली कड़ियों में उल्लेख किए गए कुछ लोगों का जिक्र करते हुए मोदी ने हरियाणा के एक अन्य निवासी प्रदीप सांगवान के प्रयासों की भी तारीफ की। सांगवान हिमालय पर्वत पर पर्यटकों द्वारा छोड़े गए कचरे को साफ करने के अभियान में लगे हुए हैं और उन्होंने छह साल पहले इस उद्देश्य से ‘हीलिंग हिमालयाज फाउंडेशन’ की स्थापना की थी।
इस अभियान के तहत जागलान ने लोगों से अपनी बेटियों के साथ तस्वीर खींचने तथा उसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने का अनुरोध किया था। बाद में उन्होंने इस पहल के लिए समर्पित एक वेबसाइट बनायी जहां लोग अपनी बेटियों के साथ सेल्फी साझा कर सकते हैं।
मोदी ने कहा कि हर किसी को ‘सेल्फी विद डॉटर’ याद है और उन्होंने जागलान से पूछा कि इसके बारे में फिर से चर्चा होते हुए देखकर उन्हें कैसा लग रहा है।
जागलान ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री सर, असल में बेटियों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए हमारे हरियाणा राज्य से आपके द्वारा शुरू की गई पानीपत की चौथी लड़ाई (बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ) मेरे लिए तथा हर बेटी समेत उन सभी लोगों के लिए वाकई बड़ी बात है जो बेटियों को प्यार करते हैं।’’
जागलान ने कहा, ‘‘मुझे यह बताते हुए खुशी होती है कि ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान शुरू हुए आठ साल हो गए हैं और यह सफल रहा है। इस अभियान को दुनिया के विभिन्न हिस्सों से काफी समर्थन मिला है।’’
अपने पैतृक जिले जींद के बारे में उन्होंने ‘पीटीआई-’ को बताया कि यह हरियाणा के उन जिलों में से एक था जहां लिंगानुपात बेहद खराब था लेकिन अब चीजें बदल गयी हैं।
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