नयी दिल्ली, 19 जनवरी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के मसौदे में नए संशोधन को “अभिव्यक्ति की आजादी पर चोरी- छिपे हमला” करार दिया और इसे वापस लेने की मांग की।
इसमें सोशल मीडिया कंपनियों को उन समाचार लेखों को हटाने के लिए कहा गया है, जिन्हें पत्र सूचना कार्यालय द्वारा “फर्जी” माना गया है।
विपक्षी दल ने यह भी कहा कि संसद के आगामी सत्र में नियमों पर चर्चा की जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को मसौदा सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में एक संशोधन जारी किया, जिसे उसने पहले सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया था।
सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिये आईटी नियम का मतलब “इमेज टेलरिंग” (छवि गढ़ने) के नियम हैं।
खेड़ा ने यहां कांग्रेस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में पूछा कि अगर मोदी सरकार ऑनलाइन खबरों की “तथ्य जांच” करती है तो केंद्र सरकार की “तथ्य जांच” कौन करेगा?
उन्होंने आरोप लगाया, “इंटरनेट का गला घोंटना और पीआईबी के माध्यम से ऑनलाइन सामग्री को सेंसर करना मोदी सरकार की ‘तथ्य जांच’ की परि है।”
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY