देश की खबरें | राज्य ‘जीआरएपी’ प्रभावित निर्माण श्रमिकों को अदालती आदेशों के बिना भी मुआवजा दें: न्यायालय

नयी दिल्ली, एक मार्च उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को निर्देश दिया कि वे दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध प्रतिक्रिया कार्ययोजना (जीआरएपी) उपायों के कारण गतिविधियों के बंद होने से प्रभावित निर्माण श्रमिकों को अदालती आदेशों के बिना भी मुआवजा दें।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि श्रम उपकर के रूप में जुटाई गई धनराशि का उपयोग कर प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया जाना चाहिए।

दिल्ली-एनसीआर में औसत वायु गुणवत्ता के आधार पर ‘जीआरएपी’ के तहत प्रदूषण रोधी उपायों को लागू किया जाता है।

पीठ ने कहा, ‘‘जहां तक ​​2024 और 2025 का सवाल है, हमने राज्य को मुआवजा देने के निर्देश जारी किए हैं। हम यह स्पष्ट करते हैं कि इसके बाद जब भी जीआरएपी उपायों के कार्यान्वयन के कारण निर्माण गतिविधियों को बंद करना होगा, इस अदालत द्वारा 24 नवंबर 2021 को जारी निर्देशों के अनुसार प्रभावित श्रमिकों को मुआवजा दिया जाएगा।’’

न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि न्यायालय द्वारा मुआवजा देने के लिए कोई विशिष्ट निर्देश नहीं दिया जाता है, तो भी एनसीआर राज्यों को मुआवजा देना होगा।’’

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि हरियाणा ने जीआरएपी-4 के प्रथम और द्वितीय चरण में क्रमशः 2,68,759 और 2,24,881 श्रमिकों को मुआवजा दिया है।

दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि 93,272 श्रमिकों को मुआवजा दिया जा चुका है और शेष पंजीकृत श्रमिकों के लिए सत्यापन प्रक्रिया जारी है।

शीर्ष अदालत ने पहले निर्माण श्रमिकों को पूर्ण निर्वाह भत्ता न देने के लिए दिल्ली सरकार की खिंचाई की थी।

दिल्ली सरकार को निर्देश दिया गया कि वह श्रमिकों के पंजीकरण को सुनिश्चित करने के लिए तुरंत श्रमिक संघ की बैठक बुलाए।

राजस्थान के लिए भी इसी प्रकार के निर्देश पारित किए गए, जहां दो जिले भरतपुर और अलवर, एनसीआर में आते हैं। इसके अलावा हरियाणा के 14 जिले और उत्तर प्रदेश के आठ जिले भी एनसीआर में आते हैं और वहां भी श्रमिक संघों की बैठक बुलाने और निर्वाह भत्ता देने के निर्देश दिए गए।

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