देश की खबरें | राज्य प्रवासी मजदूरों के प्रति ‘कृतघ्न’ नहीं हो सकता: मद्रास उच्च न्यायालय
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चेन्नई, तीन जून मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राज्य प्रवासी मजदूरों से काम लेकर उनके प्रति ‘कृतघ्न’ नहीं हो सकता। इसने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह फंसे प्रवासी मजदूरों को ‘‘युद्ध-स्तर’’ पर भोजन और आश्रय उपलब्ध कराए।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जी. राजगोपालन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने समग्र निर्देश दिए हैं, जिनका पालन किया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुरूप मजदूरों से यहां तक कि ट्रेन का किराया भी नहीं लिया जा रहा।

इसके साथ ही उन्होंने मामले में समग्र रिपोर्ट दायर करने के लिए समय मांगा।

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याचिकाकर्ता-अधिवक्ता एपी सूर्यप्रकाशम ने कहा कि हजारों मजदूर भोजन और आश्रय से वंचित हैं, इसलिए उन्हें भोजन, आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर इलयाराजा और 400 अन्य को पेश करने का निर्देश दिए जाने का आग्रह किया है, जिन्हें महाराष्ट्र के सांगली पुलिस अधीक्षक द्वारा कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है।

मामला जब वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के लिए आया तो न्यायमूर्ति एन किरुबाकरन और न्यायमूर्ति आर हेमलता की खंडपीठ ने कहा, ‘‘यह देखना राज्य का दायित्व है कि प्रत्येक प्रवासी मजदूर को पर्याप्त भोजन, पेयजल, आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं मिलें।’’

पीठ ने कहा कि प्रवासी मजदूरों से काम लेकर राज्य उनके प्रति ‘कृतघ्न’ नहीं हो सकता।

अदालत ने कहा कि इसलिए राज्य सरकार को निर्देश दिया जाता है कि वह भोजन, आश्रय और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित प्रवासी मजदूरों की पहचान करे और उन्हें ‘‘युद्ध-स्तर’’ पर ये सुविधाएं उपलब्ध कराए तथा सुनवाई की अगली तारीख को रिपोर्ट दायर करे।

मामले में अगली सुनवाई आठ जून को होगी।

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