चेन्नई, छह सितम्बर द्रमुक अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर सोमवार को होने वाले एक सम्मेलन का विरोध किया और आरोप लगाया कि यह संसदीय लोकतंत्र के खिलाफ है, इसलिए यह ‘अस्वीकार्य’ है।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनईपी को लेकर राज्यपालों की बैठक के उद्घाटन सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये संबोधित करने वाले हैं।
स्टालिन ने कहा कि एनईपी पर संसद में चर्चा के लिए इंतजार किये बिना राज्यपालों का विचार प्राप्त करना ‘‘लोकतंत्र को कमजोर करता है और इसलिए यह अस्वीकार्य है।’’
उन्होंने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि केंद्र ने जुलाई में नीति की मंजूरी से पहले केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में एनईपी पर चर्चा नहीं की (जिसमें राज्य के शिक्षा मंत्रियों ने हिस्सा लिया)।
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द्रमुक प्रमुख ने मांग की कि मोदी ऐसे समय में ‘‘राज्यपालों का विचार लेने’’ की पहल छोड़ दें जब संसद का सत्र होने वाला है और (एनईपी पर) संसद में एक ईमानदार, लोकतांत्रिक चर्चा’’ का मार्ग प्रशस्त करें।
‘‘उच्च शिक्षा को बदलने में एनईपी-2020 की भूमिका’’ विषय पर सम्मेलन का आयोजन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
संसद का मानसून सत्र 14 सितम्बर से शुरू होना है और यह एक अक्टूबर तक चलेगा।
राज्यपालों के इस सम्मेलन में सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री, राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे।
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