देश की खबरें | स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी से श्रीलंका के राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान मछुआरों का मुद्दा उठाने की अपील की

चेन्नई, 20 जुलाई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की भारत यात्रा के दौरान उनके समक्ष भारतीय मछुआरों के मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकार का मुद्दा उठाने की अपील की।

स्टालिन ने इस सप्ताह शुरू होने वाली विक्रमसिंघे की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा का जिक्र करते हुए कच्चातीवू द्वीप को पुन: ‘प्राप्त करने’ और श्रीलंका में तमिल भाषी लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करने को तमिलनाडु के लोगों के लिए चिंता का सबसे बड़ा मुद्दा बताया।

प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर विक्रमसिंघे 21 जुलाई को भारत की आधिकारिक यात्रा पर आने वाले हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, श्रीलंका का दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

स्टालिन ने मोदी को पत्र लिखकर कहा कि यह जरूरी है कि श्रीलंका में तमिलों के सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक अधिकारों की रक्षा की जाए ताकि वे अन्य नागरिकों की तरह समान रूप से गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

यहां जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि स्टालिन ने मोदी को 19 जुलाई को पत्र लिखा।

तमिलनाडु सरकार की ‘सहमति’ के बिना भारत द्वारा कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपने के लगभग 50 साल पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा, ‘‘यह द्वीप ऐतिहासिक रूप से भारत का हिस्सा रहा है और तमिलनाडु के मछुआरे पारंपरिक रूप से इस द्वीप के आसपास के जलक्षेत्र में मछली पकड़ते रहे हैं।’’

भारत ने 1974 में कच्चातीवू को श्रीलंका को सौंप दिया था।

उन्होंने कहा कि भारतीय मछुआरों को पारंपरिक जलक्षेत्र में मछली पकड़ने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी जाती और श्रीलंका की नौसेना का उत्पीड़न काफी बढ़ गया है तथा वे भारतीय मछुआरों को घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार करते हैं।

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